अभिव्यक्ति

Friday, 20 April 2018

कदम.

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  तेरे नन्हे नन्हे. कदमों से   जब तू चलती ठुमक ठुम हो जाता है घर का हर इक कोना रोशन   मेरी गुडिया कितनी प्यारी    सबसे न्यारी , राजकुमार...
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Wednesday, 11 April 2018

डर...

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डर , ये तो इक हिस्सा है    जिंदगी का...    कुछ खोने का . कुछ न ,पाने का   एक अहसास है   जो सभी को होता है   बहुत नोर्मल चीज है    जि...
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Thursday, 29 March 2018

तन्हाई....

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अपनी तन्हाई को सीने में समेटे रहती हूँ    कभी हँस लेती हूँ   .कभी चुपचाप    कुछ अश्क पी लेती हूँ      कभी पलट पन्ने डायरियों के       ...
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Friday, 23 March 2018

एहसास..

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बचपन ,भोलापन ,निष्फिक्र   गाना ,नाचना ,हँसना ,रोना    सब कुछ कितना प्यारा      जैसे जैसे उम्र बढी़       ये सब बातें कब भूल गए       एह...
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Wednesday, 21 March 2018

जल ,अनमोल .....

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जल ही जीवन है    जानते हैंं सब    पर रखते इसका ध्यान कितने    कि बचाना है इसको     करके जतन     समझना होगा इसका मोल     क्योंकि ये तो...
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Tuesday, 20 March 2018

डर..

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  इस शहर से कुछ दूर   इक बस्ती है ..    बसते है वहाँ भी    कुछ इंसान    घरों के नाम पर हैं    कुछ टूटे-फूटे   टाट के पैबन्द लगे दरवाजे...
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Wednesday, 14 March 2018

हसरतें

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हसरतों की दुनियाँ    उम्मीदों का दामन पकडे़     चली जा रही हैंं       मंजिल की ओर       सफलता, असफलता      आशा ,निराशा      सभी को साथ...
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कुछ मेरे बारे में

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शुभा
मैं ,शुभा ,बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा है । अब मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ ।
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