Saturday, 9 May 2026

खबर

आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों 

यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है

आती हैं खबरें अखबारों में 

  एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत 

हो जाती है बयाँ ..... 

  कोई कर्ज में डूबा किसान 

 या ,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी

 लेता है जब खुदकुशी का निर्णय 

 आसान  तो नहीं होता .......

खुदकुशी थी वो ,या मार डाला गया 

 समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने ,

  दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई 

   वो तो खडा बस यहाँ एक साए -सा ।

    जीते-जी मर तो गया था वो पहले से 

    कैसे समझता कोई मायूसी उसकी 

      शमशान भी किस -किस को रखता याद 

      उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था 

  शुभा मेहता 

9thMay ,2026

14 comments:

  1. बहुत -बहुत धन्यवाद ,मेरी रचना को पाँच लिंकों में स्थान देनें के लिए आदरणीय 🙏

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  2. मर्मस्पर्शी भावाभिव्यक्ति है यह शुभा जी। मैं भी कुछ ऐसा ही महसूस करता हूँ।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद जितेन्द्र जी

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  3. शमशान भी किस -किस को रखता याद
    उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था ... बहुत सुन्दर.

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    1. बहुत -बहुत धन्यवाद

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  4. वर्तमान हालातों को बयान करता एक कटु सत्य

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    1. बहुत -बहुत धन्यवाद अनीता जी

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  5. बहुत-बहुत धन्यवाद ।

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  6. Replies
    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  7. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  8. स्थित्प्रग्य है श्मशान ... बहुत भावपूर्ण ...

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