Saturday, 15 August 2026

ख्याल ....

अंबर के उस पार 
भी शायद ,होगा कोई शहर  ...
बसते होगें मेरे अपने 
 जो हैं बिछड़ गए हमसे ।
 करते होगें 
 याद हमें क्या ?
  या ,फिर भूल गए होंगे 
    या ,फिर बस गई होगी उनकी 
      कोई नई दुनियाँ ......
       रहते थे जो साथ हमारे 
        अब बसते हैं बस 
       यादों में ......   ।
 
    शुभा मेहता 
    16 th Aug ,2026


  

7 comments:

  1. सुंदर भावपूर्ण रचना!

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  2. बहुत -बहुत धन्यवाद अनीता जी

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  3. उव्वाहहहहह
    शानदार
    वंदन

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  4. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  5. यादें हमेशा याद आती हैं
    खूबसूरत !!

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