भी शायद ,होगा कोई शहर ...
बसते होगें मेरे अपने
जो हैं बिछड़ गए हमसे ।
करते होगें
याद हमें क्या ?
या ,फिर भूल गए होंगे
या ,फिर बस गई होगी उनकी
कोई नई दुनियाँ ......
रहते थे जो साथ हमारे
अब बसते हैं बस
यादों में ...... ।
शुभा मेहता
16 th Aug ,2026
सुंदर भावपूर्ण रचना!
ReplyDeleteबहुत -बहुत धन्यवाद अनीता जी
ReplyDeleteउव्वाहहहहह
ReplyDeleteशानदार
वंदन
बहुत-बहुत धन्यवाद
Deleteयादें बनी रहें |
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
ReplyDeleteयादें हमेशा याद आती हैं
ReplyDeleteखूबसूरत !!