रूको ,कहाँ भागे जा रहे हो
इस भीड़ में ,भीड़ के पीछे
देखा -देखी ,होड़ा -होड़
बड़ा मकान ,बड़ी कार
और बड़ी ,और बड़ी
अंतहीन सिलसिला
बदले में टेंशन , डिप्रेशन
ज़रा ठहरो ...सोचो
शांति कहाँ है ?सुकून कहाँ है ?
कहाँ मिलेगी ....
अंतहीन सिलसिला है ...
मकान को घर बनाओ ..
चैन की बंसी बजाओ ।
शुभा मेहता
8th ,oct ,2026
सरल शब्दों में कितनी सच्ची बात कह गयी दी।
ReplyDeleteभाग-दौड़,मारा-मारी, कितना हास्यास्पद है न सुकून लुटा रहे सुकून पाने के लिए...।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ९ अक्टूबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बहुत-बहुत धन्यवाद प्रिय श्वेता ,मेरी रचना को इस मंच पर स्थान देने के लिए ।
ReplyDeleteपहले मकान को घर बनाओ फिर अपने दिल को, उसमें ही रहती है असली शांति
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार अनीता जी
Deleteप्रेरित करती पंक्तियाँ !
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
ReplyDeleteबहुत बढ़िया शुभा जी 👌! जैसी सरल शुभा जी वैसी सरल अभिव्यक्ति! सच मे "मकान को घर बनाओ और चैन की बंसी बजाओ" यही कर लें कोई तो दुःख काहे का 🙏
ReplyDeleteबहुत -बहुत धन्यवकद प्रिय सखी रेणू जी
Deleteसच है
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
Deleteसुन्दर सृजन
ReplyDeleteबहुत -बहुत धनंयवाद
ReplyDeleteसुंदर
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