Thursday, 12 March 2026

पसंद

मुझे तो रंग -बिरंगे फूल पसंद थे 
 गमलों में खिले ......
   लाल -पीले गुलाब 
    और बीच में महकता सफेद मोगरा 
     रंगों से सजा घर 
जिसके हर कौना ,अलग -अलग रंगों से सजा हो 
  खुशी देते थे ये रंग ....
    रंगीन चादरें करीनें से लगी हुई 
       बडी सुकून भरी नींदें दे जाती थी ..
     अब ,ये सफेद दीवारें , अलमारी ,चादर 
       भाती नहीं मन को ..
          पता नहीं शायद इस सजावट को ही 
           आजकल " एस्थेटिक" कहते हैं .....

    शुभा मेहता 
   12th,2026
        
  

1 comment:

  1. रंग जीवन में उत्साह और उमंग घोलते है कोई शक नहीं...सुंदर अभिव्यक्ति दी।
    सस्नेह
    सादर।
    --------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ मार्च २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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