गमलों में खिले ......
लाल -पीले गुलाब
और बीच में महकता सफेद मोगरा
रंगों से सजा घर
जिसके हर कौना ,अलग -अलग रंगों से सजा हो
खुशी देते थे ये रंग ....
रंगीन चादरें करीनें से लगी हुई
बडी सुकून भरी नींदें दे जाती थी ..
अब ,ये सफेद दीवारें , अलमारी ,चादर
भाती नहीं मन को ..
पता नहीं शायद इस सजावट को ही
आजकल " एस्थेटिक" कहते हैं .....
शुभा मेहता
12th,2026
रंग जीवन में उत्साह और उमंग घोलते है कोई शक नहीं...सुंदर अभिव्यक्ति दी।
ReplyDeleteसस्नेह
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ मार्च २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।