अभिव्यक्ति
Wednesday, 30 March 2016
यथार्थ
›
मुट्ठी में बंध रेत खिसक रही है धीरे -धीरे बना रही है कुछ निशाँ शायद अपना नाम लिख रही है पढ़ रही हैं उस...
Tuesday, 22 March 2016
होली
›
आज रंग लो होली में तन -मन इन इन्द्र धनुषी रंगों से सब मिल खेलो होली धो डालो सब मैल वो मन का इन टेसू के फूलों से भूल बैर भ...
5 comments:
Wednesday, 16 March 2016
यादें
›
यादें कभी भी चुपके से आकर गुदगुदाती हैं मन को रखा है सहेज कर दिल के कोनों की किसी बंद अलमारी मे सहसा ...
2 comments:
जिदंगी
›
सुबह -सुबह आज कोई मिली मुझे मैंने देखा उसे बड़ी खूबसूरत सी सजी -सँवरी सी ग़ौर से देखा मैंने क...
3 comments:
Thursday, 3 March 2016
अभिलाषा
›
माँ , अभी तो हूँ मैं छोटी सी , नन्ही सी फिर भी नन्हे ये हाथ मेरे कभी ढोते बोझा और कभी होता इन हाथों में मेर...
5 comments:
Friday, 19 February 2016
मेरी सहेलियाँ
›
मैं , मुस्कान ,हँसी और ख़ुशी बचपन की थी खास सहेलियाँ हरदम रहती साथ -साथ खेला करती , कूदा करती फिरती बनक...
9 comments:
Thursday, 11 February 2016
जग जननी
›
हे जगजननी वीणावादिनी हंसवाहिनी करते तुम्हे प्रणाम हम सब बालक है अज्ञानी दे दो थोडा ज्ञान ...
9 comments:
‹
›
Home
View web version