अभिव्यक्ति
Thursday, 2 June 2016
मिट्टी
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सुबह-सुबह अचानक मिट्टी की सौंधी खुशबू तर कर गई तन -मन को उठ कर देखा तो पाया बरखा की बूँदो ने ...
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Sunday, 15 May 2016
शब्द
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शब्द ... प्रस्फुटित होते हुए धीरे -धीरे ले रहे आकार एक रचना का टेढ़े -मेढ़े छोटे ;बड़े ...
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Saturday, 23 April 2016
किताबें
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वो कहते हैं कि नहीं बेहतर दोस्त कोई मुझ जैसा जिसने भी की दोस्ती मुझसे वो हमेशा सुख पाया अरे नहीं पहचाना? मैं...
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माँ धरा
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हे माँ धरा कहाँ से लाती हो इतना धैर्य कैसे सह लेती हो इतना जुल्म इतना बोझ इतना कूड़ा -कचरा करते हैं हम मान...
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रेशमी रजाई
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छोटी थी तब माँ ने इक दिन एक कहानी सुनाई थी थी जिसमे एक राजकुमारी ओढ़े जो रेशमी रजाई बस तभी से उसने भी ...
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Wednesday, 30 March 2016
यथार्थ
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मुट्ठी में बंध रेत खिसक रही है धीरे -धीरे बना रही है कुछ निशाँ शायद अपना नाम लिख रही है पढ़ रही हैं उस...
Tuesday, 22 March 2016
होली
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आज रंग लो होली में तन -मन इन इन्द्र धनुषी रंगों से सब मिल खेलो होली धो डालो सब मैल वो मन का इन टेसू के फूलों से भूल बैर भ...
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