अभिव्यक्ति

Sunday, 31 January 2016

प्रतीक्षा

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    कब से खड़ी     झरोखे से      बाट निहारूँ      कहाँ हो तुम      और ये चाँद निर्मोही     देखो  मुझे देख      कैसे मुस्कुरा रहा है   ...
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Saturday, 23 January 2016

बसंत -बहार

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   देखो बसंत - बहार में    अवनि ने धरा रूप नया     बन गई हरा समन्दर     इठलाती , बलखाती   ओढ़ छतरी गगन की       झुलाती पल्लू बसन्ती    ...
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Thursday, 14 January 2016

आओ त्यौहार मनाएं

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    आओ आज सभी मिलकर      संक्रांति पर्व मनाये        चढ़ जाये सब       छत पर भैया        खूब पतंग उड़ाए        हो जाये पेच पर पेच      ढ...
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सपने....

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  सपने जो देखे थे      एक साथ हमने      पूरा करने की        होड़ में , साथ        धीरे -धीरे जैसे        छूटता सा गया        जिन्हें , ...
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Friday, 8 January 2016

फुटपाथी

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    सर्द ठिठुरती रात में        एक चादर भी      मयस्सर नहीं जिन्हें      कुछ चिथड़े से लपेटे हुए       देखा है कई बार इन्हें       सर्द ...
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Tuesday, 29 December 2015

स्वागतम्

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  आओ मिल करें सब     स्वागत नववर्ष का      मिल गले एक दूजे से      करले दूर गिले -शिकवे      ख्वाहिशें जो रह गई       अधूरी हैं ..    ...
Tuesday, 1 December 2015

ठहाके

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   सब कहते हैं , मैंने भी पढ़ा है      हँसना अच्छा है सेहत के लिए        अब सवाल ये है कि       हँसू तो किस बात पर          किसके साथ या ...
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कुछ मेरे बारे में

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शुभा
मैं ,शुभा ,बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा है । अब मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ ।
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