अभिव्यक्ति

Thursday, 27 October 2016

दीपावली

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लो आई फिर दीपावली   चलो ,इस बार मन के किसी कोने में दीप जलाएं इक शांति का , प्रीति  का स्नेह का   फिर इस    मन दीप से   दीप से दीप...
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Tuesday, 18 October 2016

मेरा बचपन

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   वो बस्ता लेकर भागना     सखी -सहेलियों से      कानाफूसियाँ    भाग -दौड में     चप्पल टूटना      टूटी चप्पल जोडना      नाश्ते के डब्ब...
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Friday, 16 September 2016

वाह री दुनियाँ

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    दूर के ढोल सुहावने       पास बजें तो शोर       घर की मुर्गी दाल बराबर        बाहर की अनमोल      कोई अपना ज्ञान बखाने      अधजल गगरी...
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Wednesday, 14 September 2016

मातृ भाषा

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  हिंदी मेरी आन है     हिंदी मेरी शान     मातृ भाषा मेरी    तुझको मेरा प्रणाम     कितनी मीठी     कितनी सहज      शब्दों का भंडार      ...
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Wednesday, 24 August 2016

कान्हा.....

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    ओ कान्हा......       इक बार तो आओ       संग मेरे भी       फाग रचाओ       अरे , सुनते क्यों नहीं ?      बैठ कभी कदंब डाल पर    छेडो...
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Saturday, 13 August 2016

एकाकी

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    सुना था        कान होते हैं         दीवारों के भी         पर अब जाना         कि कान ही नहीं          दीवारें तो       होती हैं सशर...
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Saturday, 6 August 2016

दोस्ती

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  बचपन में इक दूजे की     थाम उँगली चलना       खेलना -कूदना        लडना -झगडना        एक ही खिलौने के लिए         कभी शाला में        ...
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कुछ मेरे बारे में

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शुभा
मैं ,शुभा ,बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा है । अब मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ ।
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