Monday, 28 April 2014

योग और नृत्य

कल यानी उनतीस अप्रैल को विश्व नृत्य दिवस के रूप में मनाया जाएगा ।
तो चलिये आज हम भी इस बारे में कुछ बात करते हैं ।
     शब्दार्थ की दृष्टि से देखें तो योग अर्थात जोडना होता है और तात्विक दृष्टि से योग अर्थात परमतत्व से मिल जाना ।इसी प्रकार नृत्य का उद्देश्य भी लगभग योग जैसा ही है ।
   भारत में रंगमंच पर आने से पूर्व सभी प्रकार के नृत्य मंदिरों में ईश्वर भक्ति के स्वरूप में ही प्रस्तुत किए जाते थे ।
     नृत्य में गुरु और प्रार्थना का जितना महत्व है ,योग में भी उतना ही है । जिस प्रकार नृत्य में  सिर,गर्दन, आँख, हाथ आदि अंगों का उपयोग  विविध प्रकार से किया जाता है उसी प्रकार योग की शुरुआत में यौगिक अंग परिभ्रमण में  सिर ,आँख ,हाथ,गर्दन आदि का उपयोग किया जाता है ।
   नृत्य की विविध मुद्राएँ आसान की विविध मुद्राओं से साम्य रखती हैं ।
   योग और नृत्य द्वारा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तंदुरुस्ती प्राप्त की जा सकती है ।
    हैप्पी डांस डे ।

Friday, 18 April 2014

गपशप

सुबह का काम निपटा कर हम चारों सहेलियां अब शांति से बैठ कर चाय पी रहे है एकदम रिलैक्सड.......।
    सुना है सामने वाले घर में नये किराएदार आ गए है ।
   अच्छा... कौन है ?कहाँ से आए है ? बच्चे है या नहीं? अच्छा कैसी दिखती है ?अरे मैंने तो देखा ही नही ?
     अरे...साँस तो ले लो ।
      हाँ ,मगर मुझसे तो  रहा ही नही जाता ।
    चलो ठीक है वैसे भी मेरी तो आदत ही नहीं है किसी की पंचायत करने की  । मैं भली और मेरा काम भला  । चलो चलती हूँ ।
    उसके जाने के बाद-अरे देखो न ,कैसे दूसरों की पंचायत कर रही थी
हाँ ....उसकी तो आदत ही ऐसी है ।
   पर एक बात तो है नई पडौसन है बड़ी टिपटोप । लगता है उसका हसबैंड बड़ी कंपनी में काम करता है ।
  हाँ दो-दो तो गाडियां है ।
    चलो किसी बहाने मिलने चलते हैं ।
    अरे नही ।
      तभी माँ पूजा खत्म करके गाती हुई बाहर आई -मुझे कया काम दुनिया से .........
    चलो कल मिलते है ।

 

Tuesday, 15 April 2014

पौधे

पौधे जो हमनें लगाए थे ,आँगन में अपने ,
  बन गए हैं आज वो वॄक्ष बड़े  ।
     पाला था बड़े जतन से उन्हें ,
    पानी, मिट्टी ,खाद सभी कुछ ,
     दिया समय -समय पर ।
     और शायद इसीलिये ये वृक्ष ,लदे है फलों से ,     झुके जा रहे विनम्रता से ,मानो कह रहे हो ,
   उतारने दो हमें कर्ज अपना ।
     काश ,इंसान भी ऐसा बन पाता ।

Friday, 11 April 2014

-मन की आवाज़

क्या बात है आज बड़ी खुश नजर आ रही हो ?
  हाँ ,बात ही कुछ ऐसी है ।
   अच्छा ,हम भी तो सुनें क्या बात है ?
     अरे आज हमारे पडौस में से सुबह से ही जोर-जोर से लडने-झगडने और बच्चों के चिल्लाने की आवाजें आ रही है ।
    पर इसमें खुश होने की क्या बात है ?
    तुम भी ना --
    अरे ,तुम क्या जानों पिछले एक -दो महीने से हमारे पडौस के इस घर में शांति है ।न लडने-झगडने की आवाज़ और न ही बच्चों का शोरगुल । जैसे सब खामोश से हो गए हो ।सब कुछ अजीब सा ,शांत-शांत ।
    मुझे तो तभी लगने लगा था जरूर कोई बात है । सुना है  दोनो अलग होने की सोच रहे हैं । इसका असर बच्चों पर भी हो रहा है । वे तो मानो हँसना-खेलना भी भूल गए हैं ।
   और आज अचानक फिर से सुबह-सुबह वही लडने -झगडने की आवाजें, बच्चों का शोर सुनाई दिया तो लगा कि जैसे एक घर टूटने से बच गया  और इसीलिये मैं इतनी खुश हूँ समझी । 

Sunday, 6 April 2014

स्वास्थ्य और हम

कहते है न कि स्वस्थ व्यक्ति ही सुखी व्यक्ति होता है । अगर हम अपने स्वस्थ्य के प्रति थोड़े जागरूक रहे तो कुछ हद तक निरोगी जीवन जी सकते है । वो कहावत है न कि पहला सुख निरोगी काया ।
     हमारा शरीर एक अदभुत यंत्र है । इसको संभालना हमारा कर्तव्य है ।जैसे साइकिल के पहियों के बीच में चैन होती है  जिससे साइकिल चलती है  पर समय-समय पर हमें उसकी सफाई करनी पडती है ,तेल डालना पड़ता है ।  उसी तरह से हमें अपने शरीर की भी हिफाज़त करनी पडती है ।
     आज मै बात करूँगी पैरों की । हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर का हर एक अवयव महत्वपूर्ण है  और हम उनकी देखभाल भी अच्छी तरह करते है लेकिन अक्सर देखा गया है कि पैरों के प्रति लोग अधिकतर लापरवाह रहने हैं ( कुछ खास तबके को छोडकर जो नियमित पेडीक्योर, मसाज करवाते हैं )
      हमारे पैर हमें जहाँ हम चाहते है वहाँ ले जाते है और पूरे शरीर का वजन उठाते हैं । अक्सर जब लोग पैदल कही जाते है तो कहते हैं भाई हम तो ग्यारह नम्बर की गाड़ी से आएं है । तो इस गाडी को भी सर्विसिंग की जरूरत होती है न ।
     तो फिर देर किस बात की है चलिये आज से ही शुरू करते है । *पैरों मे अच्छी सी मसाज करवाएं ये आप स्वयं भी कर सकते है ।
    * स्ट्रेचिंग व्यायाम करें ।
     * कभी -कभी पेडीक्योर करवाएं ।
     *sometimes celebrate your feet .
     और उनकी सराहना करें ।
     स्वस्थ्य रहे खुश रहें ।



Wednesday, 2 April 2014

"मैं "

है शब्द एक अक्षर का ,
    लेकिन इसमें सारी दुनिया है समाई ।
    जिधर देखो उधर "मैं"की माया है छाई ।
     इस एक "मैं"पर लिखे जा सकते है,
     बड़े-बड़े ग्रन्थ ,
     मै ऐसा ,मै वैसा और न जाने क्या-क्या ।
      यहाँ तक कि जब हमारा कोई प्रियजन ,
    विदा लेता है हमसे ,
     तब भी बरबस मुँह से यही निकलता है
     हाय राम अब "मेरा क्या होगा ।