Saturday, 9 May 2026

खबर

आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों 

यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है

आती हैं खबरें अखबारों में 

  एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत 

हो जाती है बयाँ ..... 

  कोई कर्ज में डूबा किसान 

 या ,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी

 लेता है जब खुदकुशी का निर्णय 

 आसान  तो नहीं होता .......

खुदकुशी थी वो ,या मार डाला गया 

 समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने ,

  दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई 

   वो तो खडा बस यहाँ एक साए -सा ।

    जीते-जी मर तो गया था वो पहले से 

    कैसे समझता कोई मायूसी उसकी 

      शमशान भी किस -किस को रखता याद 

      उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था 

  शुभा मेहता 

9thMay ,2026

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