Friday, 19 June 2015

मेरे पापा

     पापा मेरे कितने अच्छे
       कितने  प्यारे प्यारे थे
        थे बड़े मितभाषी वो
       आँखों से स्नेह जताते थे
        हौले से मुस्काते थे
       पापा मेरे.. .....
       बैठाते स्कूटर पर
      चीजें दिलवाने ले जाते थे
      कपडे ,जूते ,पेन -पेंसिल और किताबें लाते थे
     और यदि होती कोई गलती
      जोर से डांट लगाते थे
        पापा मेरे... 
      पढ़ा लिखा लायक बनाया
     अच्छी सीख सिखाते थे
    फिर एक दिन ,
     बैठाया जब डोली में
     आंसू सबसे छुपाते थे
     पापा मेरे.....
     जब जाती ससुराल से में तो
     मूली ,करेला  कभी न लाते थे    
     कहाँ चले गए छोड़ मुझे अब
    याद बहुत ही आते हैं
     पापा मेरे..   

6 comments:

  1. बहुत प्यारी रचना है, दिल को छू गयी.

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  2. धन्यवाद भाईसाहब।

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  3. रुला दिया शुभा जी । मेरे पापा याद आ गए । वो भी ऐसे ही थे । वास्तव में सब पापा ऐसे ही होते हैं । सदा सौभाग्यवती रहो । तुम्हारा भाई ...राजेश । बुरा मत मानना लाड में अपनी बहन को तुम कह गया ।

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  4. धन्यवाद राजेश भाई ।

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