Friday, 11 November 2016

सवेरा

   उठो जागो मन.....
  हुआ नया सवेरा
आ गये आदित्य
  लिए आशा किरन नई
रमता जोगी ,गाए मल्हार
  झूम रहे खग वृंद
   नाचे गगन अपार
    कलियाँ चटक उठी
    चटक कर
   करा रही
नवसृजन आभास
  हरी दूब पर
  ओस बूँदों नें
    सजा दिए जैसे
   मोती हार
पक्षियों का मीठा कलरव
जगा रहा है बार -बार
उठो जागो मन....
   हुआ नया सवेरा .....
 
             शुभा मेहता
              11th Nov 2016

8 comments:

  1. Superb my most talented sis beginning of day so well described in such simple words adbhut soch adbhut shabdon ki sanrachna pratikon ka bahut khoob prayog deerghayu ho dher saara pyaar aur ashirwad khoob khoob likh 👍👍👍😃😃😃

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  2. बहुत -बहुत धन्यवाद ।

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  3. बहुत -बहुत धन्यवाद ।

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 16 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. बहुत -बहुत धन्यवाद यशोदा जी ।

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