Saturday, 9 May 2026

खबर

आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों 

यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है

आती हैं खबरें अखबारों में 

  एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत 

हो जाती है बयाँ ..... 

  कोई कर्ज में डूबा किसान 

 या ,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी

 लेता है जब खुदकुशी का निर्णय 

 आसान  तो नहीं होता .......

खुदकुशी थी वो ,या मार डाला गया 

 समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने ,

  दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई 

   वो तो खडा बस यहाँ एक साए -सा ।

    जीते-जी मर तो गया था वो पहले से 

    कैसे समझता कोई मायूसी उसकी 

      शमशान भी किस -किस को रखता याद 

      उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था 

  शुभा मेहता 

9thMay ,2026

31 comments:

  1. बहुत -बहुत धन्यवाद ,मेरी रचना को पाँच लिंकों में स्थान देनें के लिए आदरणीय 🙏

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  2. मर्मस्पर्शी भावाभिव्यक्ति है यह शुभा जी। मैं भी कुछ ऐसा ही महसूस करता हूँ।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद जितेन्द्र जी

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  3. शमशान भी किस -किस को रखता याद
    उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था ... बहुत सुन्दर.

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    1. बहुत -बहुत धन्यवाद

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  4. वर्तमान हालातों को बयान करता एक कटु सत्य

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    1. बहुत -बहुत धन्यवाद अनीता जी

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  5. बहुत-बहुत धन्यवाद ।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  7. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  8. स्थित्प्रग्य है श्मशान ... बहुत भावपूर्ण ...

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  9. बहुत सुंदर

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    1. धन्यवाद ओंकार जी

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  10. खुदकुशी नहीं. **** उसे मारा गया है
    सुन्दर रचना

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  11. लाजबाब सृजन

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    1. बहुत -बहुत धन्यवाद

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  12. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शनिवार 13 जून 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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    1. बहुत -बहुत धन्यवाद अनुज रविन्द्र जी

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  13. Replies
    1. बहुत -बहुत धन्यवाद

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  14. सच कहा आपने हम अक्सर अखबार में एक छोटी-सी खबर पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन उस एक पंक्ति के पीछे किसी की पूरी जिंदगी, संघर्ष और टूटे हुए सपने छिपे रहते हैं। किसान हो या विद्यार्थी, कोई भी यूँ ही हार मानने का फैसला नहीं करता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

    अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
    धन्यवाद!

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  15. Replies
    1. बहुत-बहुत धन्यवाद संजय जी

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  16. मर्मस्पर्शी सृजन प्रिय शुभा जी ! सादर नमस्कार!

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  17. बहुत-बहुत धन्यवाद मीना जी

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  18. भावपूर्ण सृजन

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