आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों
यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है
आती हैं खबरें अखबारों में
एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत
हो जाती है बयाँ .....
कोई कर्ज में डूबा किसान
या ,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी
लेता है जब खुदकुशी का निर्णय
आसान तो नहीं होता .......
खुदकुशी थी वो ,या मार डाला गया
समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने ,
दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई
वो तो खडा बस यहाँ एक साए -सा ।
जीते-जी मर तो गया था वो पहले से
कैसे समझता कोई मायूसी उसकी
शमशान भी किस -किस को रखता याद
उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था
शुभा मेहता
9thMay ,2026
बहुत -बहुत धन्यवाद ,मेरी रचना को पाँच लिंकों में स्थान देनें के लिए आदरणीय 🙏
ReplyDeleteमर्मस्पर्शी भावाभिव्यक्ति है यह शुभा जी। मैं भी कुछ ऐसा ही महसूस करता हूँ।
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद जितेन्द्र जी
Deleteशमशान भी किस -किस को रखता याद
ReplyDeleteउसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था ... बहुत सुन्दर.
बहुत -बहुत धन्यवाद
Deleteवर्तमान हालातों को बयान करता एक कटु सत्य
ReplyDeleteबहुत -बहुत धन्यवाद अनीता जी
Deleteसटीक
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद ।
ReplyDeleteमार्मिक
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
Deleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
ReplyDeleteस्थित्प्रग्य है श्मशान ... बहुत भावपूर्ण ...
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद
Deleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद ओंकार जी
Deleteखुदकुशी नहीं. **** उसे मारा गया है
ReplyDeleteसुन्दर रचना
बहुत-बहुत धन्यवाद
Deleteलाजबाब सृजन
ReplyDeleteबहुत -बहुत धन्यवाद
Deleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शनिवार 13 जून 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
बहुत -बहुत धन्यवाद अनुज रविन्द्र जी
Deleteअच्छी रचना
ReplyDeleteबहुत -बहुत धन्यवाद
Deleteसच कहा आपने हम अक्सर अखबार में एक छोटी-सी खबर पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन उस एक पंक्ति के पीछे किसी की पूरी जिंदगी, संघर्ष और टूटे हुए सपने छिपे रहते हैं। किसान हो या विद्यार्थी, कोई भी यूँ ही हार मानने का फैसला नहीं करता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
ReplyDeleteअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!
बहुत भावपूर्ण ..
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद संजय जी
Deleteमर्मस्पर्शी सृजन प्रिय शुभा जी ! सादर नमस्कार!
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद मीना जी
ReplyDeleteभावपूर्ण सृजन
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