Sunday, 6 October 2024

नेता जी का कुत्ता

नेता जी का कुत्ता 
   अरे भूल हो गई ....
     कुत्ता नहीं  ...
      " टौमी " नाम है उसका 
      साथ में घूमता है गाडी में 
        बड़े ठाठ से  ...
        उस दिन जैसे ही 
         नेता जी के साथ 
         गाडी से उतरा 
          अचानक ही 
          एक आम आदमी को 
   धर -दबोचा ...     
     आम आदमी दर्द से कराहता 
       चिल्लाया .......
        काट खाया रे.. ...  
         नेता जी के कुत्ते नें  . ..
         नेता जी गुर्रा कर बोले 
           किसनें हिम्मत की 
            टौमी को कुत्ता कहने की 
             सा...  . ला कुत्ता कहीं का ....   

       

शुभा मेहता 
  6th Oct, 2024

14 comments:

  1. सुन्दर सृजन

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद मनोज जी

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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  3. कटु व्यंग्य

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद अनीता जी

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  4. बहुत सुंदर व्यंग्य

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद ओंकार जी

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  5. बहुत-बहुत धन्यवाद दिगंबर जी

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  6. वाह वाह बहुत सुन्दर व्यंग्य

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  7. वाह!!!
    क्या बात..
    कटु सत्य।

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  8. बहुत खूब करार व्यंग्य

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  9. यह कविता मुझे सीधी और तीखी चोट करती हुई लगी। आप सत्ता की भाषा, उसके अहंकार और आम आदमी की बेबसी को बहुत सहज ढंग से सामने रखते हैं। टौमी और कुत्ते का फर्क असल में नाम का नहीं, हैसियत का है, और यही बात चुभती है। आम आदमी के दर्द पर नेता जी का गुस्सा करुणा नहीं, घमंड दिखाता है।

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