Friday, 4 June 2021

गुफ्तुगू बूढे बरगद से ..

वो बूढा़ बरगद 
ना जाने कितने बर्षों से 
  खडा है ...
  मुझे बहुत पसंद है 
  उसकी डालों पर बैठी 
   चिडियों की चहचहाहट 
    उसकी जटाओं से ,
  लटककर झूलना 
     बचपन में यही खेला करते थे 
      छुपाछुपी ..........
      आज भी जब भी 
       गुजरती हूँ यहाँ से ,
        कुछ देर रुकती हूँ 
        अच्छा लगता है 
         लगता है मानों वृक्ष की डालियाँ 
         करीब आकर कहना चाहती हैं कुछ 
          कान में .........लगता है जैसे कह रही हों 
            देख .सदियों से खडा हूँ यहाँ 
             अकेला .......
             बहुत कुछ देखा है इन बूढी आँखों नें 
               खेलते बच्चे मेरे चारो ओर, 
             पक्षियों का कलरव 
          मोर का नर्तन ..।
फिर वो बूढा़ बरगद 
धीर -से फुसफुसाया मेरे कान में 
  देखना ..कल आएगे 
    कुछ नेता ,कुछ अभिनेता 
     कुछ तथकथित समाजसेवक 
      लेकर कुछ पौधे ,फावडे 
         साथ में कुछ पत्रकार और 
          फोटोग्राफर भी .....
          लगाएंगे कुछ वृक्ष 
           ढेरों फोटो लिए जाएंगे 
            अखबारों मे छपेगें किस्से 
            वृक्षारोपण के .......
            उसके बाद कोई ना झाँकेगा 
             कि इन लगाए गए वृक्षों का 
             क्या भविष्य हुआ ....।
                

शुभा मेहता 
4th ,June ,2021
              

              
          
           
               
                   
                  
         
  

                
      
           

Sunday, 23 May 2021

कोरोना जंग

आज पंद्रह दिन की लडाई के बाद ,लग रहा है मानों कोई बहुत बडी जंग जीत कर आए हैं ..अरे...रे..घबराइये मत ,मैं किसी अस्त्र -शस्त्र वाली जंग की बात नहीं कर रही दोस्तों ...मैं तो उस भयानक दैत्य से जंग की बात कर रही हूँ ...नहीं पहचाना ? चलिये मैं ही बता देती हूँ ...आज से पंद्रह दिन पहले मैं सपरिवार कोविड पोजिटिव पाई गई .....न कहीं गई बाहर गई ,सभी तरह की सावधानी बरतने के वावजूद भी पकड ही लिया इसने । ईश्वर कृपा और आप सभी की दुआओं से अब सब ठीक है । 
  यहाँ मैं सभी को बताना चाहूँगी कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद ये कोरोना अधिक तकलीफ नहीं देता ,इसलिए सभी से निवेदन करूँगी कि वैक्सीन अवश्य लें । अगर हमारी तरह फिर भी आ गए चपेट में तो समय से दवाइयाँ लें ,खूब पानी पिएँ ,फल खाएँ ,पौष्टिक खुराक लें । 
  पहले मैं अपनी एक कविता जो मैंने 24April,2020 को लिखी थी साँझा करना चाहूँगी ......
सबक

इस बंधनकाल नें
बहुत कुछ हमको सिखा दिया 
कैसे जीवन जीना है 
 पाठ यह पढा़ दिया 
 भूल चले थे 
 जिन बातों को 
 याद उन्हें दिला दिया ।
 मिलजुल कर कैसे 
 रहना है .......
 काम बाँट कैसे करना है ,
 जीवन मंत्र 
 सिखला दिया..,
 हँसते -गाते ,खेल -खेल में
 काम खत्म हो जाता है ।

  समय मिला तो 
  पापा-मम्मी ,बच्चों के संग 
  खेल रहे हैं ..
   कभी खेलें आँख -मिचौनी 
    कोई छुपे ,सब ढूँढ रहे है ।

     लूडो -कैरम सोच रहे हैं
      अपने भी दिन अच्छे आए 
      धूल जमी थी ,साफ हो गई
      कैसे चमक गए सारे ।
      घर का भोजन हो गया 'इन'
      जंक फूड को 'आउट'किया 
      कितना स्वाद 'माँ'के हाथों में
      यह हमनें पहचान लिया ।
      एक बात और सीखी है ,
      वो भी तो बतलानी है ...
        खाना उतना ही लेना है
        जितना हमको खाना है 
        एक-एक दानें की कीमत 
        जान गए हैं अब हम सब ।
         छोटी-छोटी काम की बातें 
         बच्चे भी हैं सीख रहे ।

      शुभा मेहता 
          
 काफी समय तक बचने के बाद घेर ही लिया इसने । एक बातजो इस काल में मैंने सीखी ,बताना चाहूँगी .....
   कैसा महसूस करते होगे वो लोग जिन्हें हमारा समाज अस्पृश्य मान कर कितना अभद्र व्यवहार करते हैंं , शायद ये रोग हमारे दिल ,दिमाग का कचरा साफ करने आया है । 

शुभा मेहता 
23rd May ,2021



  
 

 
  

  

Thursday, 13 May 2021

जिंदगी

जिंदगी है क्या ...
कुछ ख्वाब ,कुछ हकीकत 
कभी कुछ है ,कभी कुछ
कभी सरल नदी सी बहती जाए 
  कलकल ....छलछल ....
  कभी पवन के झोंंको -सी 
    मीठी -मदमाती खुशबू लिए 
      कभी हँसाए ,कभी रुलाए 
      कभी-कभी कुछ पाठ पढाए 
      अच्छा-बुरा ,खारा-तीखा 
       तरह -तरह के स्वाद चखाए 
       नए-नए लोगों से मिलाए 
        अच्छे-अच्छे दोस्त बनाए 
        मिलना और बिछुडना दोनों 
       संग -संग चलता जाए ....
      जिंदगी  .....
     कभी -कभी कोई अजनबी 
     बन जाए सबसे प्यारा दोस्त 
      और कभी अपने भी बन जाते 
       मानों कोई गै़र .....।
      जिंदगी .......।

   शुभा मेहता 
  13th May ,2021
   

Wednesday, 7 April 2021

अस्तित्व

स्वयं के अस्तित्व का 
जिस क्षण हो जाए ज्ञान ,
करने लगो जिस क्षण 
स्वयं से बेपनाह 
 मुहब्बत ....
  रखने लगो जब ,
अपना ख्याल .......
  समझो उसी 
क्षण हुआ है  
  तुम्हारा जनम 
 फिर चाहे कितने ही वर्ष 
  गुजार दिए हों ..
   सबका ध्यान रखते हुए 
  अपने सपनों ,अपनी खुशियों का  
बलिदान करके ....।
 मना लेना जन्मदिन 
  उसी क्षण ....
  हो अस्तित्व बोध जब ।

शुभा मेहता 
8th April ,2021
    
   
  


   

Saturday, 20 March 2021

मेरी कविता

आज 21 मार्च ,विश्व कविता दिवस .....
मेरे सभी ब्लोगर मित्रों को शुभकामनाएँँ 💐💐💐💐💐💐🙏🏻🙏🏻
 वैसे मैं कोई कवियत्री नहीं हूँ ,हाँ कभी -कभी मन के भावों को सरल शब्दों में अभिव्यक्त कर लेती हूँ और आप सभी साथियों का स्नेह भाव पा लेती हूँ । हृदय से आप सभी का धन्यवाद 🙏🏻

 दिल नें कहा ,चल आज कुछ सृजन कर 
शब्दों नेंं कहा ,हमें जल्दी बाहर निकालो 
अपने विचारों को कागज पर उतारो 
वरना बहुत देर हो जाएगी और 
 हम हमेशा की तरह दिमाग से निकल कर 
कभी दाल और कभी सब्जी में मसालों के साथ
हो जाएगें जज़्ब............।
या फिर परात में उछल -कूद करते 
गुँथ जाएगें आटे के साथ 
सिक जाएंगे रोटियों के साथ 
 नहीं...................
इतना जुल्म मत करना 
अभी ले लो हाथ कलम 
कर डालो सृजन । 
  शुभा मेहता 
21 March ,2021








"इयर फोन"

 ये इयर फोन भी बडे काम की चीज़ है ।
(मेरे लिए तो )
सुबह उठते ही मेडिटेशन करने के काम आता है । भजन सुनने में भी मैं इसी का प्रयोग करती हू्ँ ,इसका पहला फायदा यह है कि आसपास कोई डिस्टर्ब नहीं होता ।
हाँ ... उपयोग से पहले मैं इसकी उलझन को सुलझा लेती हूँ और सीख लेती हूँ कि अपने विचारों को ,व्यवहार को सुलझा हुआ रखना चाहिए ,दिन बहुत अच्छा गुजरता है ।
  पर संभल कर हाँ ,लिमिट में उपयोग करती हूँ वरना कानों को खतरा । 

 शुभा मेहता 
20th March ,2021
 

Thursday, 4 March 2021

सबक ( संस्मरण)

सबक तो सबक ही है चाहे वो बडों द्वारा बच्चों को दिया जाए अथवा बच्चों द्वारा बड़ों को ,मेरा ऐसा मानना है कि किसी के भी द्वारा दी गई सही सलाह को अवश्य मानना चाहिए ।
  बात उन दिनों की है जब में लाखेरी (राजस्थान)मेंं डी ए वी स्कूल मेंं कार्यरत थी । कक्षा छ: की कक्षा अध्यापिका थी । हमारे स्कूल का नियम था कि रोज प्रार्थना सभा के बाद अपनी-अपनी कक्षा के विद्यार्थियों के नाखून और दाँतों का निरीक्षण किया जाए । यदि किसी के नाखून बढे हुए हों या दाँत गन्दे हों तो उन्हें हिदायत दी जाती ,फिर भी अगर विद्यार्थी ध्यान न दे तो प्रिन्सिपल साहब के पास ले जाया जाता । पर सभी विद्यार्थी नियम का पालन करते थे । 

मैं जब भी अपनी कक्षा के बच्चों का निरिक्षण करती थी ,तो एक.बच्चा जो पढने में काफी होशियार था ,कनखियों से मेरे हाथों कीओर ऐसे देखता मानो कुछ कहना चाह रहा हो ,शायद उसकी शिक्षिका थी इसलिए नहीं कह पा यहा था । 

बात दरअसल यह थी कि मुझे अपने नाखून बढा कर ,स़ुंंदर नेलपेंट लगाकर रखना बहुत पसंद था ।पर उसकी वो निगाहें मुझे बहुत कुछ  सिखा गई ।घर जाकर सबसे पहला काम नाखून काटने का किया गया । 

और अगले दिन वो बस मुझे देखकर हौले से मुस्कुरा दिया ।

उस बच्चे ने मुझे जीवन का बडा पाठ सिखा दिया। तब से आज तक उसकी दी हुई सीख को ध्यान रखती हूँ किसी को टोकने से पहले स्वयं अपना निरिक्षण अवश्य करना चाहिए ।

शुभा मेहता 

4th March ,2021