तो ,मम्मा दौडी़-दौडी़ आती है
उठाती झट से गोदी में
और प्यार से वो सहलाती है ।
कहाँ लगी है जरा बताओ
पूछ-पूछ घबराती है
देख निकलता खून ज़रा -सा
रोनी-सी हो जाती है ।
अभी ठीक हो जाएगा
यह कह ढाँढस बंधाती है
लेकर अपने पल्लू को
वो मेरी चोट सहलाती है
मैं भी चुप हो गोद में उसकी
सुख स्वर्ग सा पाती हूँ
इतना प्यार भला ये मम्मा
ले कहाँ से आती है ।
शुभा मेहता
11th ,January ,2020