Monday, 18 October 2021

समय की कीमत

समय एक नदी के समान है ,आप बहते हुए उस पानी को दोबारा नहीं छू सकते क्योंकि धारा जो बह गई वो वापस नहीं आएगी ।
  जिंदगी हमें सिखाती है समय का सदुपयोग करना ,समय हमें सिखाता है जिंदगी की कीमत करना । 
  जैसे गलत चीजों म़े पैसा लगाने से वो डूब जाता है ,वैसे ही गलत कामों में समय बर्बाद करने से असफलता ही मिलती है ।
  समय की कद्र करो ,वो आपकी कद्र करेगा  समय तो सभी के पास समान है ,फिर क्यों कोई सफल और कोई असफल । समय का सही इस्तेमाल करें । हर काम की पूर्व तैयारी करें । हर काम के लिए समय को विभाजित करें और उसपर अमल करें । आपको ही निश्चित करना होगा कि किस काम को कितना समय देना है ।
  सही वक्त का इंतजार मत करो ,ये खुद से नहीं आता ,उसे लाना पडता है ।
  जिसने समय की कीमत जान ली ,उसकी जिंदगी सँवर गई ।

शुभा मेहता 
15th Oct, 2021
https://youtu.be/OSDWi4P04Os

Thursday, 14 October 2021

स्वयं से प्यार करो (self love)

अगर चाहते हैं जीवन में कुछ करना ,सबके प्रिय बनना तो अपनाओ इन सभी बातों को ......
खुलकर जियो 
 वर्तमान में जियो 
 खुशियाँ फैलाओ और 
 स्वयं से प्यार करो ।
 स्वयं से बडा हमसफर कोई नहीं होता ।
  खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो.....
   कूछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं ।
   नहीं बनना मुझे किसी और के जैसा ,क्योंकि रब ने मुझ जैसा किसी और को बनाया ही नहीं ।
 Self love स्वार्थ नहीं है ।यह जरुरी है ।स्वयं का सम्मान करो , ध्यान रखो ,अपने आप से प्यार करना सीखो ।अपनी जरूरतों को समझो ।आप अपना ध्यान रखेगें तभी दूसरों का ध्यान रख पाएंगे ।आप जैसे हैं वैसे ही स्वयं को स्वीकार करेंं ।इससे क्या होगा छोटी-मोटी बिमारियाँँ तो ऐसे ही ठीक हो जाएगीं ।क्योंकि कोई टेन्शन ही नहीं रहेगी आप स्वयं को स्वीकार जो कर चुके होंगे ।
हमें लगता है हम परफेक्ट नहीं है ,और दूसरों से तुलना करने लगते । अरे भाई परफेक्ट तो कोई नहीं होता ।सोचते रहते हैं देखो हम तो कुछ कर ही नहीं पाते और इन सभी नकारात्मक विचारों का ढेर दिमाग में जमा कर लेते हैं ।
ऐसा कभी मत करो ।सोचें कि हम कौनसा काम सबसे अच्छा कर सकते हैं ,फिर कठिन परिश्रम कीजिए सफलता जरूर मिलेगी । 
कईबार माता-पिता अपने बच्चों की हर बात में कमियाँ निकालते हैं ।दूसरो के बच्चों के साथ उनकी तुलना करते रहते ..कहते हैं ..देखो उनका बच्चा कितना होशियार है और तुम किसी काम के नही ।इससे क्या होता है बच्चों में नकारात्मकता की भावना आ जाती है उनका कोन्फिडेन्स खत्म हो जाता है जो ताउम्र उनके साथ रहता है ।ऐसा कभी मत कीजिए । हमेशा उनका हौसला बढाइये । कहिये तुम जैसा कोई नहीं। उन्हें भी सिखाइये खुद से प्यार करना ,जीवन में खूब  आगे जाएंगे ।

शुभा मेहता 
14th Oct 2021
  

Wednesday, 28 July 2021

लोग ..

बचपन में माँ एक कहानी सुनाया करती थी ,सात पूँछ वाले चूहे की ....एक चूहा था उसके सात पूँछ थी ,अब भला सात पूँछवाला चूहा किसने देखा (शायद अपवाद स्वरूप कहीं हो भी ) 
लेकिन मैं कहानी सुनते -सुनते कल्पना जरूर करती । चूहा जब भी उसके मित्रों के साथ खेलने जाता तो उसके सभी दोस्त उसे छेड़ते ...चूहा भाई सात पुँछडिया रे ...और बेचारा चूहा बहुत रोता एक दिन उसने अपनी माँ से कहा ,माँ ..माँ

एक पूँछ कटवा ल़ूँ ?
माँ भी बूटे के दुख से दुखी थी ,बोली जा बेटा कटवा ले ..अब दोस्त छःपूँछ कह कर चिढाने लगे और इस तरह उसने एक -एक करके ,इतना दर्द सहकर अपनी छः पूँछ कटवा ली । 
बचपन में समझ नहीं आती थी कहानी के द्वारा क्या कहा जा रहा है ,तब तो केवल काल्पनिक चूहा बनता और शायद उसका दर्द भी कुछ-कुछ समझ आता ।
असली मतलब तो जिंदगी के उतार -चढाव झेलकर ही समझ आया ...कुछ तो लोग कहेगे .....लोगों का काम है कहना ....।
और हम भी लोगो की परवाह करके अपनी जिंदगी खुलकर नहीं जीते ।हर बात में सोचते हैं लोग क्या कहेगें ।

जब एक उम्र बीतने के बाद यानि पचासी (50)..के बाद जब कोई नारी ,अपने पंख फडफडा कर उड़ने की कोशिश करती है ,अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहती है तो 'लोग'कहते हैं ,देखो ..अब इस उम्र में पंख लग गए है। 
अरे भाई ,पंख तो पहले से ही थे पर समेट रखा था उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के लिहाफ में ।
और अब जब फुरसत के कुछ लम्हे मिले हैं तो क्यों ना फैलाए पंखों को ...  , अपने लिए कुछ करने को । लोगों का क्या उनका तो काम ही है कुछ न कुछ कहने का । तू उड ...खुलकर ,जी ले कुछ लम्हे अपने लिए भी ....।

शुभा मेहता 
29th July ,2021
  

Sunday, 25 July 2021

दोस्त

दोस्त शब्द सुनते ही सबसे पहले हमारे मन में जो भाव पैदा होते है ,बहुत ही मधुर होते हैंं ।दोस्त यानि एक ऐसा व्यक्ति जो हमेशा हमारा साथ दे ,दुख में सुख में ,हानि में लाभ में । एक बहुत ही प्यारा सा रिश्ता होता है दोस्ती का ।
  पर क्या सही में ऐसा दोस्त हमें मिल पाता है ,या फिर हम स्वयं ऐसे दोस्त बन पाते हैं । मेरी समझ से तो कुछ ही भाग्यशाली लोग होते होगे जिन्हें सच्चा दोस्त मिला होता है । 
 एक बच्चा ढाई-तीन साल की उम्र से ही खेलने के लिए कोई साथी चाहने लगता है ..हम उम्र साथियों के साथ उसे अच्छा लगता है और यहीं से शुरुआत होती है दोस्ती की । इस उम्र में वे एक दूसरे के खिलौनों से खेलते है ,खिलौने छीनते  भी हैं ,रोते हैं ,फिर थोडी देर में चुप होकर फिर से खेलने लगते हैं । न कोई ईर्ष्या न कोई द्वेष बस अपनी मस्ती में रहते हैँ ।
  उसके बाद जब बच्चे स्कूल जाने लगते हैं ,उन्हें नए दोस्त मिलते है ।वहाँ वो साथ मिलकर खेलना सीखते हैं ,मिल बाँटकर खाना सीखते हैं । जैसे -जैसे बडे होते हैं देखा देखी शुरु हो जाती है ।
 इसका अच्छा उसका खराब ,मेराभी वैसा होना चाहिए ..बस ज्यों ज्यों उम्र बढती है आपस में स्पर्धा-प्रतिस्पर्धा शुरु हो जाती है ।इसमें माँ -पिताजी का भी सहयोग रहता है क्यों कि बच्चों के सामने वो लोग ही कहते है ,बेटा हम तुम्हें उससे भी अच्छा लाकर देगें । 
पर कुछ दोस्त जीवन में ऐसे भी मिलते है जो ता-उम्र सच्चे मन से दोस्ती निभाते है  ,दोस्त के दुख में दुखी और सुख में सुखी होते हैं । 
  आजकल तो सोशल मीडिया की दोस्ती भी खूब चल रही है । इसके द्वारा भी हमें बहुत अच्छे दोस्त मिल जाते हैं कभी-कभी । सही है न जिनसे हम कभी मिले भी ना हो वो कितने प्यारे और सच्चे दोस्त बन जाते हैं । 
अंत में यही कहूँगी दोस्ती का रिश्ता बडा प्यारा -सा रिश्ता होता है अगर कोई सच्चा दोस्त मिले तो उसकी कद्र जरूर करो । 
 
 

   दोस्तों की दोस्ती से 
है रोशन जहाँ मेरा 
साथ हँसना ..
साथ रोना ...
 हर कदम पर ,
 साथ देना ,
 चाहे दुख हो 
 या हो सुख 
  साथ मिलकर 
  है बिताना 
  सबसे प्यारा 
  रिश्ता है ये 
  दोस्त ,दोस्ती 
  याराना .....।
   शुभा मेहता 
   26th July ,2021
  
 

 

Thursday, 8 July 2021

माटी

बरसात ..आहा.....
नन्ही -नन्ही फुहारों का 
  वो स्पर्श ...कितना अद्भुत !!
  मन आनंद मगन 
    माटी की खुशबू ..
     अपनी ही खुशबू 
       तू भी माटी ,
      मैं भी माटी ,
      मिल जाना है 
      तुझमें ही 
       फिर काहे इतना झमेला 
       तेरा -मेरा ,इसका -उसका 
       सब माया का खेला ।

शुभा मेहता 
9th July ,2021
      
  


Friday, 4 June 2021

मेरा बगीचा

मेरे घर  में था 
एक सुं...दर बगीचा 
   तरह-तरह के फूलों से लदा 
    गुलाब ,जूही ,गेंदा ,चमेली 
     मोगरा और सूरजमुखी ,गुडहल,
      मेरी छोटी -सी ,प्यारी -सी बिटिया को 
       बहुत भाते थे फूल सूरजमुखी ।
         एक ओर चीकू का वृक्ष  था 
      अनार था ,नारियल का भी था एक पेड
      दूसरी ओर कुछ सब्जियां थी 
        भिंडी ,बेंगन ,मिर्ची ,सेम 
         हाँ धनिया ,टमाटर भी तो था 
          एक ओर था पेड बादाम का 
            दोपहर होते ही बच्चों की टोली 
             पहुँच जाती तोडने बादाम ..
               दिन भर बस यही 
              जरा -सी आँख लगती 
             और कर जाते सब 
              तहस-नहस ...
           अब ,न वो बगीचा है 
          और न वो बच्चे ..
          अब तो बस ,बडे शहर की 
          उँची -उँची इमारतें ..
           दूर-दूर तक बस इमारतें...
            भागती -दौडती जिंदगी ...
            
शुभा मेहता 
10May ,2023
                
          
       
         
      

गुफ्तुगू बूढे बरगद से ..

वो बूढा़ बरगद 
ना जाने कितने बर्षों से 
  खडा है ...
  मुझे बहुत पसंद है 
  उसकी डालों पर बैठी 
   चिडियों की चहचहाहट 
    उसकी जटाओं से ,
  लटककर झूलना 
     बचपन में यही खेला करते थे 
      छुपाछुपी ..........
      आज भी जब भी 
       गुजरती हूँ यहाँ से ,
        कुछ देर रुकती हूँ 
        अच्छा लगता है 
         लगता है मानों वृक्ष की डालियाँ 
         करीब आकर कहना चाहती हैं कुछ 
          कान में .........लगता है जैसे कह रही हों 
            देख .सदियों से खडा हूँ यहाँ 
             अकेला .......
             बहुत कुछ देखा है इन बूढी आँखों नें 
               खेलते बच्चे मेरे चारो ओर, 
             पक्षियों का कलरव 
          मोर का नर्तन ..।
फिर वो बूढा़ बरगद 
धीर -से फुसफुसाया मेरे कान में 
  देखना ..कल आएगे 
    कुछ नेता ,कुछ अभिनेता 
     कुछ तथकथित समाजसेवक 
      लेकर कुछ पौधे ,फावडे 
         साथ में कुछ पत्रकार और 
          फोटोग्राफर भी .....
          लगाएंगे कुछ वृक्ष 
           ढेरों फोटो लिए जाएंगे 
            अखबारों मे छपेगें किस्से 
            वृक्षारोपण के .......
            उसके बाद कोई ना झाँकेगा 
             कि इन लगाए गए वृक्षों का 
             क्या भविष्य हुआ ....।
                

शुभा मेहता 
4th ,June ,2021