माँ ,धरती का सम्मान करें
आभारी हों ,दिल से ...
भूल गए हैंं शायद .
अपने स्वार्थ में हो गए हैं
इतने अंधे ...
देखो ध्यान से इसकी सुंदरता को
बहते झरनों को ,नदियों को,
फूलों को ,पेडों को
घास पर पडी उस एक ओस बूँद को
कितनी खूबसूरत है
मिट्टी की खुशबू
माँ को सजाएँ ....
हरी -हरी चुनरी पहनाएँ
देती आ रही सदियों से वो जो हमें
आओ मिलकर कर्ज चुकाएँ ।
शुभा मेहता
21st April ,2022