Saturday, 9 May 2026

खबर

आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों 

यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है

आती हैं खबरें अखबारों में 

  एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत 

हो जाती है बयाँ ..... 

  कोई कर्ज में डूबा किसान 

 या ,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी

 लेता है जब खुदकुशी का निर्णय 

 आसान  तो नहीं होता .......

खुदकुशी थी वो ,या मार डाला गया 

 समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने ,

  दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई 

   वो तो खडा बस यहाँ एक साए -सा ।

    जीते-जी मर तो गया था वो पहले से 

    कैसे समझता कोई मायूसी उसकी 

      शमशान भी किस -किस को रखता याद 

      उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था 

  शुभा मेहता 

9thMay ,2026

Thursday, 12 March 2026

पसंद

मुझे तो रंग -बिरंगे फूल पसंद थे 
 गमलों में खिले ......
   लाल -पीले गुलाब 
    और बीच में महकता सफेद मोगरा 
     रंगों से सजा घर 
जिसके हर कौना ,अलग -अलग रंगों से सजा हो 
  खुशी देते थे ये रंग ....
    रंगीन चादरें करीनें से लगी हुई 
       बडी सुकून भरी नींदें दे जाती थी ..
     अब ,ये सफेद दीवारें , अलमारी ,चादर 
       भाती नहीं मन को ..
          पता नहीं शायद इस सजावट को ही 
           आजकल " एस्थेटिक" कहते हैं .....

    शुभा मेहता 
   12th,2026
        
  

Monday, 2 February 2026

गुड़िया

हाँ ,मैं ही हूँ गुड़िया ..मतलब नाम है मेरा गुड़िया । असली नाम नहीं ,,घर का नाम है । माँ प्यार से कहती ...गुड़िया रानी बड़ी सयानी ,बात मानती सारी । 
 मैं भी बहुत खुश हो जाती ...थोड़ी बड़ी हुई तो घर में सभी मुझसे ही छोटा-मोटा काम करवानें लगे ,यह कहकर कि बड़ी सयानी है हमारी गुड़िया ..।
 एक बार हमारे घर मेहमान आए जो मेरे लिए सुंदर सी गुड़िया लाए ...मैं बहुत खुश हुई । उन्होनें कहा देखो तुम -सी ही है न गुड़िया ..खेलोगी न इससे ,देखो इसे जैसे चाहो घुमा सकती हो ,नचा सकती हो ..चाबी की गुड़िया है ये तुम्हारे इशारों पर नाचेगी .......।
तभी माँ नें पुकारा गुड़िया चलो बहुत हुआ खेल ,इधर आकर काम में मदद करो हमारी ....
  और उन्होनें चाबी भर दी .....।
शुभा मेहता 
2nd feb 2026