Wednesday, 21 March 2018

जल ,अनमोल .....

जल ही जीवन है
   जानते हैंं सब
   पर रखते इसका ध्यान कितने
   कि बचाना है इसको
    करके जतन
    समझना होगा इसका मोल
    क्योंकि ये तो है अनमोल
    बहते नल दिन रात कहीँ
    नल चलते जब ब्रश करते
    नल चलते ,बरतन धुलते
     सोचो कितना है नुकसान
       जान लो हर बूँद की कीमत
        समय रहते पहचान लो ये बात
         रखो ध्यान ,रखो ध्यान ...।

   शुभा मेहता.
    22March 2018

8 comments:

  1. Nihayat hi jaroori sandesh deti hai ye kavita jal ki kimat pehchaan na krna jaroori h sahaj saral bhasha ka upyog hi hame jal ka mahatva samjha skta h nicely penned god bless you love you 💐💐💐💐💐💐😘😘😘😘😘👏👏👏👏👏👏

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २३ मार्च २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. बहुत बहुत आभार श्वेता ।

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  3. बहुत सुन्दर सीख देती रचना....

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    1. बहुत बहुत आभार आपका..।

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  4. बहुत सुन्दर सीख‎ भरी रचना .

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  5. बहुत अच्छी सीख देती रचना

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  6. बहुत ही सुंदर लिखा है।
    हम अभी जल की कीमत नहीं जान पाए हैं।

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