Saturday, 20 March 2021

मेरी कविता

आज 21 मार्च ,विश्व कविता दिवस .....
मेरे सभी ब्लोगर मित्रों को शुभकामनाएँँ 💐💐💐💐💐💐🙏🏻🙏🏻
 वैसे मैं कोई कवियत्री नहीं हूँ ,हाँ कभी -कभी मन के भावों को सरल शब्दों में अभिव्यक्त कर लेती हूँ और आप सभी साथियों का स्नेह भाव पा लेती हूँ । हृदय से आप सभी का धन्यवाद 🙏🏻

 दिल नें कहा ,चल आज कुछ सृजन कर 
शब्दों नेंं कहा ,हमें जल्दी बाहर निकालो 
अपने विचारों को कागज पर उतारो 
वरना बहुत देर हो जाएगी और 
 हम हमेशा की तरह दिमाग से निकल कर 
कभी दाल और कभी सब्जी में मसालों के साथ
हो जाएगें जज़्ब............।
या फिर परात में उछल -कूद करते 
गुँथ जाएगें आटे के साथ 
सिक जाएंगे रोटियों के साथ 
 नहीं...................
इतना जुल्म मत करना 
अभी ले लो हाथ कलम 
कर डालो सृजन । 
  शुभा मेहता 
21 March ,2021








"इयर फोन"

 ये इयर फोन भी बडे काम की चीज़ है ।
(मेरे लिए तो )
सुबह उठते ही मेडिटेशन करने के काम आता है । भजन सुनने में भी मैं इसी का प्रयोग करती हू्ँ ,इसका पहला फायदा यह है कि आसपास कोई डिस्टर्ब नहीं होता ।
हाँ ... उपयोग से पहले मैं इसकी उलझन को सुलझा लेती हूँ और सीख लेती हूँ कि अपने विचारों को ,व्यवहार को सुलझा हुआ रखना चाहिए ,दिन बहुत अच्छा गुजरता है ।
  पर संभल कर हाँ ,लिमिट में उपयोग करती हूँ वरना कानों को खतरा । 

 शुभा मेहता 
20th March ,2021
 

Thursday, 4 March 2021

सबक ( संस्मरण)

सबक तो सबक ही है चाहे वो बडों द्वारा बच्चों को दिया जाए अथवा बच्चों द्वारा बड़ों को ,मेरा ऐसा मानना है कि किसी के भी द्वारा दी गई सही सलाह को अवश्य मानना चाहिए ।
  बात उन दिनों की है जब में लाखेरी (राजस्थान)मेंं डी ए वी स्कूल मेंं कार्यरत थी । कक्षा छ: की कक्षा अध्यापिका थी । हमारे स्कूल का नियम था कि रोज प्रार्थना सभा के बाद अपनी-अपनी कक्षा के विद्यार्थियों के नाखून और दाँतों का निरीक्षण किया जाए । यदि किसी के नाखून बढे हुए हों या दाँत गन्दे हों तो उन्हें हिदायत दी जाती ,फिर भी अगर विद्यार्थी ध्यान न दे तो प्रिन्सिपल साहब के पास ले जाया जाता । पर सभी विद्यार्थी नियम का पालन करते थे । 

मैं जब भी अपनी कक्षा के बच्चों का निरिक्षण करती थी ,तो एक.बच्चा जो पढने में काफी होशियार था ,कनखियों से मेरे हाथों कीओर ऐसे देखता मानो कुछ कहना चाह रहा हो ,शायद उसकी शिक्षिका थी इसलिए नहीं कह पा यहा था । 

बात दरअसल यह थी कि मुझे अपने नाखून बढा कर ,स़ुंंदर नेलपेंट लगाकर रखना बहुत पसंद था ।पर उसकी वो निगाहें मुझे बहुत कुछ  सिखा गई ।घर जाकर सबसे पहला काम नाखून काटने का किया गया । 

और अगले दिन वो बस मुझे देखकर हौले से मुस्कुरा दिया ।

उस बच्चे ने मुझे जीवन का बडा पाठ सिखा दिया। तब से आज तक उसकी दी हुई सीख को ध्यान रखती हूँ किसी को टोकने से पहले स्वयं अपना निरिक्षण अवश्य करना चाहिए ।

शुभा मेहता 

4th March ,2021



 


Saturday, 27 February 2021

दिल वाला साबुन ..

देखो ,दिल वाला साबुन 
महकता -सा ......
जैसे ही चेहरे पर लगाया 
एक बडा़ -सा बुलबुला बना 
उसमें तेरा अक्स दिखा 
प्यारा -सा ....
फिर खेलने लगी मैं 
उस बुलबुले से .
फूटा ....और कितने सारे 
छोटे-छोटे बुलबुले 
सभी में तू दिखाई दी 
कित्ती सारी 
छोटी -सी ,प्यारी सी 
मुस्कुरा रही थी 
मुझे देखकर 
मैं भी टकटकी लगाए 
देखे जा रही थी 
फिर धीरे -धीरे 
फूट गए सब बुलबुले ,
और तू फिर समा गई 
मेरे दिल में ...

शुभा मेहता 
28 th feb .2021

Sunday, 27 December 2020

एक पत्र , मानव के नाम ......

नमस्ते 🙏🏼हे मानव ,
    
         आज मैं बहुत खुश हूँ ,बताऊँ क्यों ? 
   बस चार दिन शेष हैं मेरी जिंदगी के .....😊
   आप कहेगें ,अरे भाई .... जीवन समाप्त होने को है और तुम खुश हो !  हाँ ...बहुत खुश ....।
    मैंने अपनी तीन सौ इकसठ दिन की अब तक की जिंदगी में क्या-क्या नहीं झेला ,सिर्फ़ बद्दुआएं ही आई मेरे हिस्से में , सभी को कहते सुनता हूँ ऐसा साल कभी न आए । अब चार दिन और झेलना है ।देखो सभी खुशी-खुशी मेरी विदाई की तैयारी कर रहे हैं ।
 पर मेरा आप सभी से एक सवाल है ,इन सबमें मेरा क्या दोष है ? ये "वाइरस' जो मेरे साथ-साथ चला आया ,मेरे साथ क्या ये तो पहले से ही प्रवेश कर गया था ,मेरी बदनसीबी यही कि मुझे इसके साथ रहना पडा ..और इतनी बद्दुआएं झेलनी पडी ।
   मुझे कितना बुरा लगता है ,जब बात-बात में मुझे ही कोसा जाता है ।मैंने भी चाहा था ,मेरे रहते चारों ओर खुशियाँ हों । मैंने कभी नहीं चाहा कि लोग परेशान हो ,अकाल  मौत मरें ।
    पर एक बात तो आप भी मानेंगे कि कुछ अच्छी आदतें भी सिखा कर जा रहा हूँ मैं ,मानते हैं न ?
  अब जाते-जाते यही दुआ है मेरी ....आने वाला वर्ष आप सबके लिए खुशियाँ लेकर आए ,धरती पर फिर से खुशहाली हो ,मिलना-जुलना हो ..।
   चलो अब चलता हूँ । 
आपका 
   2020 ..
  शुभा मेहता 
28th Dec ,2020

Tuesday, 24 November 2020

मेरे मन की बात ..

बात मेरे मन की है ,जरूरी नहीं आप भी सहमत हों इससे 🙏🏻

बात कुछ दिनों पहले की है....जब कोविड का डर नहीं था । मैं रोज बगीचे में घूमने जाया करती थी । वहाँ एक बेंच पर अक्सर एक लडकी को अकेले गुमसुम बैठा देखती । एक दिन जा पहुँची उसके पास और वहीं बैठ गई । मैंने उसकी ओर मुस्कुरा कर देखा बदले में उसनें भी एक फीकी -सी मुस्कान दी ।अब तो रोज में उसके पास जाकर बैठने लगी पर उसे कभी खुश नहीं देखा ।मैं बात करने की कोशिश भी करती तो वह बस हूँ ,हाँ में जवाब देती।
एक दिन मौका देखकर मैंनें उससे पूछा ..बेटा ,इतना उदास क्यों रहती हो ?सुनकर डबडबाई आँखों से बोली ..आंटी ,मैं सुंदर नहीं हूँ न ,इसलिए मुझे कोई प्यार नहीं करता , न घर में और न बाहर । सब मुझे काली -कलूटी कह कर चिढाते हैंं और मेरी खुद की माँ कहती है कौन करेगा तुझसे शादी ? और रोज न जाने कौन -कौन से नुस्खे गोरा होने के मुझ पर प्रयोग करती है ....तंग आ गई हूँ मैं तो । 
 तभी एक बडी -सी काली बदली आई और जोर से बरसात होने लगी ..मैंनें कहा चलो कही शेड के नीचे चलते हैं ..वो बोली आप जाइये मैं यहीं बैठी हूँ शायद बारिश से मन कुछ शांत हो जाए ...। और वो वहीं बैठी रही । मैंनें महसूस किया मानों वो बादल से पूछ रही है......
     ओ..बादल .....
  क्या इस बार तेरी लिस्ट में
   नाम है मेरा ?
   मेरे मन के कोने-कोने को भिगोने का 
मैं भी मन के किसी कोने में 
तेरी नमी महसूस करूँ 
   मेरा भी मन करता है 
   कोई मुझको प्यार करे ,
  स्नेह दे ....
  मैं खूबसूरत नहीं ,
  क्या ये दोष है मेरा ?
  कितना बुरा लगता है मुझे 
    क्या तुम्हे पता है....?
  मैं भी कुछ उदास हो गई .....समझ नहीं पा रही ...क्यों करते हैं हम ये भेदभाव ?जानबूझ या अनजाने में क्यों किसी का दिल दुखाते हैं? क्या रंग -रूप हमारे हाथों में है ?बंद होना चाहिए ये सब ?क्या गोरा या सुंदर होना ही इंसान के अच्छा होने का सबूत है ?

 .शुभा मेहता 
 25th Nov ,2020

पुराना दोस्त

सुना था कि ,तुमनें
 इस दिवाली .......
सारा घर साफ कर डाला ।
घर ? या वो यादें
 वो सपने ..
  वो नोटबुक की स्याही 
    वो आँगन का बडा पेड़
      बैठ छाँव में जिसकी 
        गाते थे गीत 
         खेलते थे अंताक्षरी 
        वो भी कटवा दिया शायद ।
        वो झूठमूठ के झगड़े
          वो हमारी खिलखिलाकर 
            सभी साफ कर दी 
             साबुन से धोकर ।
             सबब इसका न जान सकी अब तक
            जान बसती थी एक -दूसरे में हमारी   
             कोई बात नहीं दोस्त ..
                देखो नये सपने ..
              भर लो नए रंग ......
              मैं भी पा ही लूँगी कोई 
            दोस्त ............अच्छा सा ।

      24th Nov ,2020