देखो कोई अल्हड किशोरी
बस अपने में ही मगन
कर रही है जतन
कि,कच्ची अमियाँ
लग जाये कुछ हाथ ।
न कोई चिंता न फिकर
है दुनियाँ के झंझटों से
बेखबर कुछ इस तरह
बस अपनी ही धुन में
कितना अच्छा हो
जीवन के सारे पल
ऐसे ही बीतें
उन्मुक्त और बिंदास ।
Monday, 23 February 2015
अल्हड किशोरी
Thursday, 19 February 2015
सफलता
ये बात तो सोलह आने सत्य है के कड़ी मेहनत के बिना सफलता प्राप्त नहीं होती पर हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते कि किसी भी कार्य में सफल होने के लिए सही प्लानिंग भी उतनी ही आवश्यक है ।
इसका अर्थ यह कि कठिन परिश्रम के साथ सही प्लानिंग करना अति आवश्यक है ।
जब हम अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते है तभी उसे प्राप्त करने के लिए अगला कदम बढ़ा सकते हैं । कई बार होता ये है के व्यक्ति निश्चय ही नहीं कर पाता किआखिर उसे करना क्या है ? और इस कारण उसे असफलता का सामना करना पड़ता है ।
अगर हमें सफलता प्राप्त करनी है तो हमें यह जानना होगा के आखिर हमें करना क्या है । एक बार ये निश्चित हो गया , फिर जुट जाओ लक्ष्य को पाने के लिए , फिर कैसा इंतज़ार? मंज़िल आपको सामने ही दिखाई देगी । जरूरत है पहला कदम बढ़ाने की । पहला कदम तो बढ़ाना ही पड़ेगा तभी तो हम मंज़िल तक पहुंच सकेंगे ।
तो फिर देर किस बात की हो जाओ शुरू।
चल उठा कदम ,बढ़ा कदम
पा ले अपनी मंज़िल को
रुक मत राह में , ना डर मुश्किलों से
है मंज़िल चाहे दूर ,तू रख स्वयं में विश्वास
जीत कर दिखला जहाँ को
जीत कर दिखला ।
Friday, 6 February 2015
स्वच्छ भारत
स्वच्छ भारत ,स्वस्थ भारत का ,
नारा गूँज रहा है चारो ओर ,
गली -मोहल्लों मे ,
बैठकें बुलवाई गई ,
रखना है सभी को ध्यान सफाई का ,
आदेश फरमाए गए ।
जगह -जगह बडे-बडे ,'डस्टबीन' रखवाए गए ।
होता था साथ में चाय -नाश्ते का प्रावधान भी, और अंत में स्वच्छ भारत के नारे के साथ
सभा समाप्ति की घोषणा ।
और फिर वहाँ का मंजर ,क्या बताएँ ...
खाली गिलासों का ढेर, जो हवा के साथ उड़कर फैलते है चारों ओर ,
डस्टबीन बेचारे ,मुंह खोले ,आस लगाए ,
शरमा रहे होते है अपनी उपस्थिति पर ,
और ये तथाकथित पढे-लिखे लोग ,
किनारे खडे होकर गप्पें हाँक रहे होतें हैं ।
उधर सडक पर कोई नेता जी ,
खडे हैं ब्रांड न्यू झाड़ू ले कर ,
केमरामैन पीछे-पीछे दौड रहे है ,
कौनसा पोज़ अच्छा रहेगा ?
कर्मचारी साथ में खुशबूदार सेनेटाइज़र लिए ।
हम भी सोचने पर मजबूर हो गए ,
ऐसे बनेगा स्वच्छ भारत ?
पर आज जब देखा, एक बच्चे को ,
चॉकलेट खाकर रेपर हाथ में लिए है ,
माँ कह रही है बेटा फ़ेंक दे सड़क पर ,
बच्चा बोला -डालूँगा इसे कूड़ेदान में ,
आपको पता नहीँ क्या?
हमें देश को स्वच्छ बनाना है ,
इसकी शान बढ़ाना है ।
Wednesday, 4 February 2015
मैंने देखा है
मैनें देखा है,वृक्षों को छांव देते हुए ,
फूल और फल देते हुए
नदियों को मीठा जल देते हुए,
न किसी से कुछ पाने की चाह , न आस ।
और इंसान है कि जब ,
भाई -भाई को कर्ज देता है
पूरा ब्याज भी लेता है
पता नहीं वो बचपन के पल ,
जो बिताए थे साथ
कहाँ चले जाते है ,
और शायद लौट कर कभी वापस नहीं आते ,
बस रह जाती हैं कुछ धुंधली यादें ,
जो रुलाती हैं अक्सर अकेले में ,
ले जाती हैं पीछे -
वो कैसे एक नारंगी को ,
आधा -आधा बांट कर खाते थे ,
और आज आलम ये है कि ,
विरासत को बांटना है आधी-आधी ,
ये मेरा हक वो तेरा हक ,
और भूल जाते हैं सब
यह भी कि खाली हाथ जाना है
फिर क्यों ये लड़ाई ?
मिल बाँट के रहने में ही है भलाई ।
Friday, 16 January 2015
भोर किरन
भोर की पहली किरन ,
दिलाती है अहसास ,
आगे बढने का ,
आकर जगाती है मुझे ,
हौले से आकर कान में कह जाती है कुछ ,
शायद कहती है -उठ जा ,उठ जा ,
छू ले बढ कर आसमां
मैं भी फिर उठ कर मुस्कुरा देती हूँ ,
कोशिश करती हूँ छूने की उसे ,
लेकिन वो मेरी पकड़ से छूट ,
भाग जाती है दूर...,
देकर अहसास कुछ कर गुजरने का
किसी और को जगाने ।
Sunday, 4 January 2015
लक्ष्य नववर्ष का
सबसे पहले सभी को नववर्ष की शुभकामनायें ।
कैसा रहा आपका बीता हुआ वर्ष । खैर छोड़िये हम तो आने वाले वर्ष की बात कर रहें है।
क्या सोचा है आपने ?कोई लक्ष्य निर्धारित किया ? अक्सर नववर्ष पर सभी कोई न कोई लक्ष्य निर्धारित करते हैं ,और बड़े जोर -शोर से उसपर अमल करना भी शुरू करते हैं । लेकिन कुछ समय बाद जोश धीरे धीरे ठंडा पड़ने लगता है और हम निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाते । नव वर्ष का उत्साह धीरे धीरे कम होने लगता है और ज़िन्दगी उसी रूटीन ढर्रे पर चलने लगती है ।इसी तरह साल ब साल गुजरते जाते है ,और जो संकल्प हम साल के शुरू होने पर लेते हैं , कुछ नया करने का , आगे बढ़ने का ,कुछ दिनों बाद सब ज्यों का त्यों । और शायद हम यह देखने की कोशिश भी नहीं करते के क्यों हम निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाते ? क्यों हम अपने काम को ईमानदारी से नहीं कर पाते ? शायद हम सभी कम मेहनत में बहुत कुछ पा लेना चाहते हैं । लेकिन किसी भी कार्य में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत के साथ दृढ़ संकल्प भी करना होगा तभी हम अपना निश्चित किया लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे ।
तो आइये इस वर्ष को यूँ न गुजरने दें , कोशिश करें इसे अब तक का 'बेस्ट ' वर्ष बनाने की ।जो संकल्प हमने अपने आप से किये हैं उन्हें पूरा करने में जी -जान से जुट जाएँ । आगे बढ़ने से पहले सोचे कि पिछले सालों में आपसे कहाँ चूक हुई है और फिर उनसे सीख लेते हुए उन्हें दोबारा न होने दें ।
तो चलिए आज से ही आरम्भ कर दीजिये बढाइये पहला क़दम अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर ,बस जरूरत है दृढ संकल्प की । all the best .....
Monday, 22 December 2014
तितलियाँ
खुले पैर बागीचे में दौडना ,
तितलियों के पीछे,
उन्हें पकड़ना ,पर तोड़ देना
कभी सोचा न था ,क्या गुजरेगी उन पर ।
आज भी याद है माँ की वो बात ,
" क्यों पकड़ती हो इन निरीह तितलियों को ,
काश ,होती ज़ुबाँ इनके भी ,
बयाँ कर सकती वो दास्ताँ अपनी " ।
हुआ अब ये अहसास ,
जब देखती हूँ, सुनती हूँ ,
न जाने कितनी मासूम तितलियों को,
पकड़े जाते हुए ,कुचले जाते हुए ,
दिल भर जाता है ,रोने को आता है ,
मन करता है चीखने को ,
कोशिश करती हूँ ,गला रुंध जाता है ।
पर अब हिम्मत जुटानी होगी ,
आवाज उठानी होगी ,
चलना होगा मिल कर साथ ,
ताकि,कोई तितली न खोए ,फिर रंगो को ।
कितने रंग भरती हें ,जीवन में ये ,
उड़ती हुई ही अच्छी लगती है ये ।