Saturday, 15 August 2026

ख्याल ....

अंबर के उस पार 
भी शायद ,होगा कोई शहर  ...
बसते होगें मेरे अपने 
 जो हैं बिछड़ गए हमसे ।
 करते होगें 
 याद हमें क्या ?
  या ,फिर भूल गए होंगे 
    या ,फिर बस गई होगी उनकी 
      कोई नई दुनियाँ ......
       रहते थे जो साथ हमारे 
        अब बसते हैं बस 
       यादों में ......   ।
 
    शुभा मेहता 
    16 th Aug ,2026


  

Saturday, 9 May 2026

खबर

आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों 

यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है

आती हैं खबरें अखबारों में 

  एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत 

हो जाती है बयाँ ..... 

  कोई कर्ज में डूबा किसान 

 या ,डिप्रेशन से जूझता कोई विद्यार्थी

 लेता है जब खुदकुशी का निर्णय 

 आसान  तो नहीं होता .......

खुदकुशी थी वो ,या मार डाला गया 

 समाज के झूठे दंभ या गरीबी ने ,

  दर्द बूढे़ बरगद का समझे क्या कोई 

   वो तो खडा बस यहाँ एक साए -सा ।

    जीते-जी मर तो गया था वो पहले से 

    कैसे समझता कोई मायूसी उसकी 

      शमशान भी किस -किस को रखता याद 

      उसके लिए ये किस्सा रोजमर्रा था 

  शुभा मेहता 

9thMay ,2026

Thursday, 12 March 2026

पसंद

मुझे तो रंग -बिरंगे फूल पसंद थे 
 गमलों में खिले ......
   लाल -पीले गुलाब 
    और बीच में महकता सफेद मोगरा 
     रंगों से सजा घर 
जिसके हर कौना ,अलग -अलग रंगों से सजा हो 
  खुशी देते थे ये रंग ....
    रंगीन चादरें करीनें से लगी हुई 
       बडी सुकून भरी नींदें दे जाती थी ..
     अब ,ये सफेद दीवारें , अलमारी ,चादर 
       भाती नहीं मन को ..
          पता नहीं शायद इस सजावट को ही 
           आजकल " एस्थेटिक" कहते हैं .....

    शुभा मेहता 
   12th,2026
        
  

Monday, 2 February 2026

गुड़िया

हाँ ,मैं ही हूँ गुड़िया ..मतलब नाम है मेरा गुड़िया । असली नाम नहीं ,,घर का नाम है । माँ प्यार से कहती ...गुड़िया रानी बड़ी सयानी ,बात मानती सारी । 
 मैं भी बहुत खुश हो जाती ...थोड़ी बड़ी हुई तो घर में सभी मुझसे ही छोटा-मोटा काम करवानें लगे ,यह कहकर कि बड़ी सयानी है हमारी गुड़िया ..।
 एक बार हमारे घर मेहमान आए जो मेरे लिए सुंदर सी गुड़िया लाए ...मैं बहुत खुश हुई । उन्होनें कहा देखो तुम -सी ही है न गुड़िया ..खेलोगी न इससे ,देखो इसे जैसे चाहो घुमा सकती हो ,नचा सकती हो ..चाबी की गुड़िया है ये तुम्हारे इशारों पर नाचेगी .......।
तभी माँ नें पुकारा गुड़िया चलो बहुत हुआ खेल ,इधर आकर काम में मदद करो हमारी ....
  और उन्होनें चाबी भर दी .....।
शुभा मेहता 
2nd feb 2026





Saturday, 6 December 2025

ख्वाहिशें....

ये मन भी बड़ा अजीब  है 
कितनी ख्वाहिशें पाल लेता है 
   बस उन्मुक्त गगन में 
    अविरत ,विचरण करता रहता है 
   सोच को लगाम लगती ही नहीं 
     ऐसा होता ,वैसा होता 
       क्षण भर में तो कहाँ से कहाँ 
         पहुँच  जाता है ...
         काश ऐसा होता ,काश वैसा होता
          फिर उन ख्वाहिशों को पूरा करनें में
            घिसता रहता है ......
               पता ही नहीं चलता 
                इस आपाधापी में 
                 कब उम्र गुजर जाती है 
                 पा भी लेता है 
                  भौतिक सुविधाएँ...
                  लेकिन कहीं खो जाती है 
                   वो प्यार भरी बातें 
                   वो सुकून ....।


शुभा मेहता 
6th nov ,2025
                 

          

Saturday, 2 August 2025

सेवानिवृति के बाद .....

एक उम्र गुजरने के बाद 
कोई खास काम नहीं ,
नौकरी भी पूरी हुई
 अब कोई रुटीन नही
बस ,सन्नाटा -सा रहता है
 सोचती हूँ ,कौन हूँ मैं 
 घर बनाया ,बगीचा बनाया 
 और खुद को चारदिवारी में खो दिया 
  साइकल से ,स्कूटर 
स्कूटर से कार ......
  तीव्रगति से दौडता जीवन 
  पर अब .............
धीरे-धीरे चलती हूँ 
कहीं गिर न जाऊं ,डरती हूँ 
शहर -शहर घूमी 
अलग -अलग संस्कृतियों को देखा -जाना 
पर अपनें आप से अनजान रही 
आखिर मैं हूँ कौन 
प्रकृति के साथ भी खिलवाड किया 
जाने-अनजाने .....
  पानी का भी भर -भर उपयोग (दुरुपयोग) किया
प्रकृति भी अब पूछ रही है 
  कौन है तू ...?
   अब कुछ कुछ आ रहा है समझ 
     मै तुम हूँ ,और तुम मैं 
      दोनों को एक दूसरे को सम्हालना है 
       धरती को स्वर्ग बनाना है ।
      

शुभा मेहता 
2nd Aug ,2025 
  



Wednesday, 9 July 2025

सही कहा ना....

दुनियाँ का सबसे सरल काम ,
दूसरों की गलतियाँ निकालना 
और सबसे कठिन काम 
अपनी गलती मानना ....।
  शुभा मेहता 
 19th ,July, 2025
  





Thursday, 12 June 2025

कौआ ,बालकनी और मैं

मुंबई शिफ्ट  हुए मुझे दो साल होने को आए । यहाँ देखा कि चील ,कौए बहुत हैं ।सुबह-सुबह बालकनी से देखो तो बहुत सारे मंडराते नजर आ जाते थे । अभी तक जहाँ भी रहे वहाँ कबूतरों की बहुतायत थी वैसे यहाँ कबूतर तो हैं ही ,साथ में कौवे भी । 
  कौवे सुबह-सुबह आकर बालकनी में काँव-काँव करते । 
   हमनें बचपन में कौवों के बारे में कुछ बातें सुनी थी ,जैसे 
 अगर उन्हें उडाओ या भगाओ तो ये पीछा नहीं छोडते ,पहचान लेते हैं ,पता नहीं इस बात में कितनी सच्चाई है ।
  चलिए फिलहाल तो बात हमारी बालकनी और कौवे की चल रही है ,तो भई एक दिन जब सुबह-सुबह कौवे जी का राग शुरू हुआ, मैंने एक पारले-जी का बिस्कुट बालकनी की मुंडेर पर रख दिया । थोडी देर बाद क्या देखती हूँ कौवे जी धीरे-धीरे मुंडेर पर खिसकते हुए आगे बढ़ रहे थे फिर धीरे से बिस्कुट उठाकर ये जा वो जा ...। 
  अब तो उनका रोज का क्रम बन गया ,मुझे भी आनंद आनें लगा ,अब वो ज्यादा काँव-काँव नहीं करते बस दो तीन बार आवाज लगाते है और बिस्कुट पाकर उड़ जाते हैं ।
  एक दिन सुबह-सुबह देखा तो पारले-जी बिस्कुट खत्म हो गया ,मैंनें उसे गुड-डे बिस्कुट दिया ,पर कौवे जी को पसंद नहीं आया बिना लिए ही उड गया बेचारा ,तब समझ आया कि खानें में इनकी भी पसंद-ना -पसंद होती है ।

    शुभा मेहता 
13th June, 2025



 

Thursday, 1 May 2025

फितरत

सच ही कहते हैं .....
हम इंसानों की बडी अजीब -सी 
फितरत है ........
 जो होता है , संतोष नहीं 
जो नहीं है ,बस भागे चले जाते हैं 
  उसके पीछे ..
चैन ,सुकून  सब खो बैठते हैं 
  बस होड़ा-होड़ .....।
    अब देखो न...
प्रकृति प्रदत्त चीजें ,
जो मिली हैं उपहार स्वरूप 
अलग-अलग गुणधर्म लिए 
 अब मिर्ची कम तीखी चाहिए 
  मीठे फलों में नमक मिर्च लगाएंगे
 बेचारे करेले को तो नमक लगाकर कर
इस कदर निचोड लेते है 
   कि बेचारा आठ -आठ आँसू रो लेता है 
 उस पर तुर्रा ये कि ,हमारे करेले 
जरा भी कडवे नहीं ...
गुण धर्म से कुछ लेना -देना ही नहीं
आपका क्या कहना है ? 

शुभा मेहता 
3rd May ,2025


   

Monday, 10 February 2025

बूढ़ा बचपन

झुकी कमर ,कांपते हाथ 
धुंधली आँखों के सौ सवाल 
 खिलौनों की जगह छडी पकडता 
  बूढ़ा बचपन मुस्कुराता हर हाल ।
  कभी धूप में नंगे पाँव दौड़ा 
   आज छांव में ठहर गया 
    जो कल था उछलता  पानी -सा 
    अब चुपचाप  ठहर गया है 
      खेलता दोस्तों संग कभी 
       अब यादों संग खेलता है 


   शुभा मेहता 
   10th February, 2025

  
         

Sunday, 6 October 2024

नेता जी का कुत्ता

नेता जी का कुत्ता 
   अरे भूल हो गई ....
     कुत्ता नहीं  ...
      " टौमी " नाम है उसका 
      साथ में घूमता है गाडी में 
        बड़े ठाठ से  ...
        उस दिन जैसे ही 
         नेता जी के साथ 
         गाडी से उतरा 
          अचानक ही 
          एक आम आदमी को 
   धर -दबोचा ...     
     आम आदमी दर्द से कराहता 
       चिल्लाया .......
        काट खाया रे.. ...  
         नेता जी के कुत्ते नें  . ..
         नेता जी गुर्रा कर बोले 
           किसनें हिम्मत की 
            टौमी को कुत्ता कहने की 
             सा...  . ला कुत्ता कहीं का ....   

       

शुभा मेहता 
  6th Oct, 2024

Tuesday, 30 July 2024

बरतन (लघुकथा )

टोकरी में पड़े सारे बरतन जोर -जोर से चिल्ला रहे थे ..
"ये इंसान  भी ना ,क्या समझता है अपनें आप को ...जो भी गुस्सा हो ,जिससे भी गुस्सा हो बिना सोचे समझे हम पर उतार देता है "
 थाली बोली ,"देखो मेरी हालत ..खाना पसंद नहीं आया तो मुझे खानें सहित जमीन पर पटक दिया इतनी जोर......से 
मुड गई  हूँ अब टेबल पर टिक ना पाऊंगी "
 देखो ना इतना छोटा - सा बच्चा ...उसनें तो मुझे पछाड़कर अधमरा कर दिया नन्ही चम्मच बोली ।
   जब  भी बस नहीं चलता ना किसी का किसी पर ...शामत हमारी ही आती है .।

  शुभा मेहता 
30th July, 2024


 

Sunday, 14 July 2024

मसालेदान

"आपके मसालेदान  में कभी मसाले होते ही नहीं ,जब देखो तब खाली" बहू बोली .....। मैं बस मुस्कुरा कर रह गई। 
  मुझे साफ ,चमकता रंग बिरंगे मसालों से सजा मसालेदान बहुत अच्छा लगता था । हर सप्ताह धो कर चमकाती ,फिर मसालों से सजा मसालेदान देखकर बडी खुश होती ।
  मिर्च, धनिया ,हल्दी रंग-बिरंगे मसाले .....
   लेकिन  जब भी अच्छी तरह साफ करती ,मसाले भरती 
अक्सर ही मसालेदान या तो हडबडी में टेढा हो जाता और सारे मसाले आपस में गड्डमड्ड....  .बहुत  बुरा लगता 
 फिर मैंनें भी बस थोड़े-थोड़े मसाले ही निकालने शुरु कर दिए  और फिर ये आदत में शुमार  हो गया ।
   मैं समझती हूँ कई घरों में इस तरह की (बेतुकी)बातें होती होगीं उनका उदभव भी शायद ऐसे ही हुआ होगा ।...अब जिसे असलियत पता न हो उसे तो ये बात बेतुकी ही लगेगी .न कि भला कोई  इतने कम मसाले क्यों निकालेगा ..
है न ......।
  
 

Friday, 26 April 2024

मिसमैच

वाह  रे जिंदगी ..... 
  मिसमैच ......
 
कभी कभी लगता है पूरी जिंदगी ....
 जिंदगी में हर चीज मिसमैच 
 चल रही है ..या कहें रेंग रही है 
   अधिकतर  लोगों की ....
    ढोए जा रहे हैं किसी तरह 
       ये बोझ .........
      अरे , खानें के लिए  सजाई गई 
       थाली में भी जब एक समान 
         ' मैच ' होते बर्तन नहीं होते तो 
            खटकते हैं आँखों में 
              और हम जो हैं 
            ता -उम्र कैसे निभा लेते हैं 
              हाँ चलन है आजकल 
               मिक्स एंड मैच का ....
                  ठीक भी है ..
                   अच्छा लगता है 
                 अलग -अलग रंगों का संयोजन 
                   पर ,मिसमैच ...........  ?
               आपको क्या लगता है ....
                    


शुभा मेहता 
27thApril ,2024
              

    
 
 

Friday, 23 February 2024

सुंदरता

 सुंदरता की दुकानें 
  हर गली -मौहल्ले  में 
    चाहे महिलाएं हो या पुरुष 
     सभी के लिए  
       ब्यूटी पार्लर ......
       लोग जब 
       इन दुकानों से 
 बाहर निकलते हैं 
   तो पहचानें नही जाते 
      बहुत ढूंढी पर 
       मन की सुंदरता की 
         कोई दुकान 
           मिली नहीं ...
           
            
              


 
          

Monday, 5 February 2024

झगडा ....

तीर ,कटार ,बरछी ,भाला 
 सभी आपस में झगड रहे थे 
 हम एक वार में किसी का भी 
  कर सकते हैं काम -तमाम 
  तभी दीवार पर टंगी बंदूक 
   इठला कर बोली ..
    मुझ -सा दम किसी में नहीं ..
     और शब्द .............
      पीछे से ,बस ..
        हौले -से मुस्कुरा दिए.....।

शुभा मेहता 
6th January ,2024


Saturday, 23 December 2023

पंखी ....

सब कहते हैं 
इन पंछियों से सीखो कुछ ..
कैसे कुछ दिन बाद  ही ,
जब जान जाते हैं 
 कि हो गए  सक्षम 
   दे देते हैं नन्हें बच्चों को 
  खुला आसमान ..
   क्या पता है हमें 
 कि आते होगें 
 ये बच्चे कभी 
 मिलने ....
   तो फिर हम क्यों 
    इतने तन्हा 
     इतने उदास 
       इंतजार  करते 
        आने का उनके 
        सीखो ना ....
         पंछियों से ...
          क्या इनके पास दिल होता है 
             पता नही 
           हाँ ....इतना पता है 
           इनके पास  फोन नहीं होता 
             इनके कान नहीं तरसते  होंगे ना 
                फोन की घंटी सुनने को ...
                   शायद भूले हुए  पंछियों  का 
                      फोन आ जाए  ......

शुभा मेहता 
22thDec ,2023
    
   

Sunday, 10 December 2023

रूठना ....

रूठने -मनाने के किस्से 
  बडे आम है.....
 किसी का रूठना 
  किसी का मनाना 
    पर मैं .....
    तो कभी रूठी ही नही 
      हालाँकि कई मौके आए 
       जीवन में .......
        कि रूठा जा सकता था 
           पर , जानती थी कि 
             कोई मनाएगा नहीं 
               सारी उम्र बस 
                इसको उसको मनाती ही रही 
                  लगी रही उधेडबुन में 
                    उधडी  ऊन से बुने 
                    स्वेटर की गांठें पीछे 
                        छुपाती रही ......।
                          

शुभा मेहता 
10th ,Dec ,2023

Friday, 8 December 2023

मौसम का हाल

आज का दिन 
कैसा है ...?
यानि ,कैसा महसूस कर रहे हो आज ? 
प्रसन्न या थोडे -से उदास 
या फिर  चिंतित..
या पता ही नहीं चल पा रहा कि 
 कैसे हैं आज ....? 
  चलो ...अपनी भावनाओं को 
     मौसम मान लो ...
      फिर सोचो ......
      सोकर उठे तो मौसम  साफ,
      मन शांत, प्रसन्न.....
        पर एक घंटे बाद....
        मौसम विभाग  की सूचना...
          भारी बरसात, तूफान...
          हमारे मन के भाव भी 
           एकदम वैसे ही हैं..
            हमेशा बदलते रहते हैं
             मौसम  की तरह.....
           घना कोहरा ..
            चिंता .....
         गरजते बादल ...
        गुस्से से तमतमाता चेहरा 
        फिर अचानक  ....मन शांत 
         आकाश साफ......।

     शुभा मेहता 
    8th Dec ,2023

          
          


'Extra.....'(अतिरिक्त)

ये extra शब्द  
 बडा दिल दुखाता है 
  बार-बार यह अहसास 
  करवाना कि हम extra हैं 
    किसी भी खेल में ,
     या नृत्य स्पर्धा में 
     extra नृतक ...
     पता होता है उन्हें कि 
      खेलना या प्रस्तुति देना 
        नहीं है उनकी नियती 
         पर सीखना और 
          मेहनत करना तो है न 
          या जो मुख्य कलाकार 
           या खिलाडी हैं 
            उनका हर पल ध्यान रखना 
             कभी-कभार स्वार्थवश 
              ये सोच भी आती है 
               शायद किसी को चोट लग जाए 
                 तो नंबर मेरा आ जाए 
                  कोई न कोई आस लिए 
                ये extra अपना काम 
             किए जाते हैं......

शुभा मेहता 
8th Dec 2023