आज तुमसे कुछ कहना चाह रही हूँ ,समय मिले तब पढना ।
अपने शरीर की संभाल करना बहुत जरूरी है ,तुम स्वस्थ्य रहोगी तभी तो अपने बच्चों व परिवार का ध्यान रख सकोगी । अपने खाने-पीने का ध्यान रखो । अभी तो तुम्हें बहुत कुछ करना है जीवन में ,बच्चों को पढा-लिखा कर बहुत आगे भेजना है । तुम अगर अभी से शरीर का ध्यान नहीं रखोगी तो ,कैसे कर पाओगी ये सब? एक बात याद रखना ..शरीर स्वस्थ तो सब कुछ ठीक ।
समझते हैं हम ,तुम पर काम का दबाव रहता है पर इतना तनाव ठीक नहीं बेटा ,हम सब तुम्हें बहुत प्यार करते है ..बस इतना ही कहना चाहती हूँ ।
तुम्हारी माँ
सभी ब्लॉगर मित्रों को नमस्कार 🙏
आप सोच रहे होगें कि शुरुआत मैंनें इस पत्र से क्यों की ? तो मित्रों ,आजकल जहाँ देखो वहाँ तनाव ही तनाव दिखाई देता है ।आसपास कही भी स्वाभाविक हँसी दिखाई नहीं देती ,ऐसा लगता है जैसे मिलने पर लोग जबरदस्ती चेहरे पर मुस्कान लाते हों ।
इतना तनाव ग्रस्त क्यों है आज का युवा वर्ग शायद जल्दी-जल्दी सब कुछ हासिल करना चाहता है ,कंपीटीशन के जमाने में स्वयं को आगे रखने की होड़ में न ढंग से खाता है न पूरी नींद सोता है ।
मेरा तो बस इतना ही कहना है ....सबसे जरुरी स्वयं की तंदरुस्ती ,चौबीस घंटों में से कुछ लम्हें अपने लिए निकाल कर पसंदीदा काम करो । अपने समय और कार्य को आवश्यकता अनुसार विभाजित करो ,और सदा मुस्कुराते रहो । सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ ......
शुभा मेहता