मैंने कुछ सीखा आज
एक मकड़ी से
निरन्तर प्रयास करते रहना
जुट जाना जी जान से
चाहे , कोई कितनी ही बार
उजाड़ दे आशियाना
फिर-फिर प्रयास
कामयाबी की ओर
सुबह-सुबह जब देखा
एक मकड़ी बुन रही है जाला
अरे ,हटाओ इसे
कित्ता गन्दा है
बस जरा सा मौका मिला
बुनने लगती हैं
झट दौड़ कर ले आई झाड़ू
पट से हटा दिया
ये न सोचा किसी का आशियाना था वो
सोचा, उनका ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता होगा
या फिर डिप्रेशन ?
मनुष्यों की तरह ?
क्या होता होगा
उनका भी कोई डॉक्टर ?
पता नहीं
अब पता भी कैसे लगे
बेजुबां हैं वो तो .....
शाम को देखा
फिर वही मकडी़....
उसी जोश के साथ
बुनने में लगी थी
आशियां अपना
. . सीखा बहुत कुछ .....।
Tuesday, 21 March 2017
प्रयास
Wednesday, 8 March 2017
नारी दिवस
नही..... आज कुछ नहीं लिखा
महिला दिवस के उपलक्ष में
नारी ,शक्ति है ,दुर्गा है
सहनशीलता की मूरत है
कुछ नहीं लिखा
बस पढ़ रही हूँ
कुछ ऐसे ही .. संदेश
कुछ महिलाओं को
अपनी सफलता पर
मिले हुए सम्मान
कुछ गरीब .....
महिलाओं पर उतारी गई फिल्में
कैसे जीती हैं वो
ये दिखाया गया
सच...
पर होगा क्या इससे
प्रश्न यही व्यथित कर रहा
क्या इससे सुधरेगी
उनकी दशा ?
सदियों से सब ऐसे ही
है चल रहा
अगले वर्ष फिर
दोहराया जाएगा
यही सभी कुछ
पर शायद
रहेगा सब
जस का तस..।
शुभा मेहता
8th March ,2017
Friday, 24 February 2017
औकात...
ब्रांडेड जूते, चप्पलों से
ठसाठस भरती जा रही
जूतों की अलमारी
बेचारे सादे
बिना ब्रांड के
पुराने चप्पल
दबे जा रहे थे
दर्द के मारे
कराह रहे थे
तभी ,इठलाती
इक ब्रांडेड जूती बोली
यहाँ रहोगे तो ऐसे
ही रहना होगा दबकर
देखो ,हमारी चमक
और एक तुम
पुराने गंदे ...हा....हा....
फिर एक दिन
पुरानी जूतों की शेल्फ
रख दी गई बाहर
रात के अँधेरे में
चुपचाप पुराने चप्पल
निकले और
धुस गए अपनी
पुरानी शेल्फ में
अपनी "औकात"
जान गए थे ।
शुभा मेहता
24th feb .2017
Friday, 10 February 2017
आज...
जिंदगी के हर लम्हे को
मस्ती से गुजार लो
जो आज है
कल न होगा
जी भर के जी लो
आज खुशी से
तो , कल
हर पल
यादगार होगा
कल तो गया ,
कल अभी आया नही
अभी तो सिर्फ़
आज है पास हमारे
तो चलो ,
जी भर के जी लें
इन जादुई क्षणों को
आज ........
शुभा मेहता
10th feb .2017
Tuesday, 17 January 2017
अधिकार
अध्यापिका पढ़ा रही थी
मौलिक अधिकार
समानता का अधिकार ,
स्वतंत्रता का अधिकार
समझाया हर किसी को ,
है अधिकार
विचार व्यक्त करने का
तो मैंने पूछा
क्या हम भी अपने
मन के विचार व्यक्त
कर सकते हैं ?
वो बोली डाँटते हुए
चुप रहो ,कक्षा को
डिस्टर्ब मत करो
मैं बेचारी कुछ
समझ न पाई
घर जाके
पूछा माँ से
माँ ..क्या हम सभी को है
अधिकार अपने
विचार व्यक्त करने का?
है न माँ ? सच है न ?
माँ चुप ....
मैं तब भी
कुछ समझ न पाई .....
Saturday, 31 December 2016
नई नोटबुक
चलो दौड़कर ले आते हैं
नोटबुक इक नई
तीन सौ पैंसठ पन्नों वाली
कोरा सफेद
हर इक पन्ना
सोच समझ कर
भरना होगा
इक -इक पन्ना
सुंदर सुघड़
लिखाई से
प्रेम प्रीत की स्याही से ।
शुभा मेहता
31st December ,2016
Friday, 23 December 2016
समय
जीवन चलने का नाम
बहता है झरने की मानिंद
अविरत.......
समय के तो मानों
लगे हो पंख
उडता है
नही करता
किसी का इंतजार
बस समाप्ति की
ओर है ये वर्ष ,फिर....
नया साल है आने वाला
नई खुशियाँ है लाने वाला
कर ले पिछले काम खतम
फिर नईकौड़ी,नया दाव
भुला कर सब
शिकवे गिले
करनी है इक
नई शुरुआत।
शुभा मेहता
23rd Dec ,2016