Friday, 14 September 2018

मेरी हिन्दी...

हिंदी मेरी आन है
  हिंदी मेरी शान है
    मातृभाषा मेरी
     तुझको मेरा प्रणाम है
      कितनी मीठी
      कितनी सरल है
      शब्दों का भंडार है हिन्दी
     एक शब्द के कितनें ही  अर्थ
       एक अर्थ के कितनें  ही शब्द
       वाह !! कमाल है हिंदी
          मेरी हिंदी ,मेरी  हिंदी
          देश का गौरव भाषा मेरी

             शुभा मेहता
        14th September ,2018

 
           
      

Tuesday, 21 August 2018

फूल....

छत के कोने में
  बतियाते फूल
   सब मिल बगिया को
     महकाते फूल
      लाल ,पीले ,नीले
      सफेद फूल
       न गिला ,न शिकवा
         न जात ,न पात
           न बडा न छोटा
            न ऊँचा ,न नीचा
            मंदिर हो ,मस्जिद हो
            हो गिरजा या चर्च
             सभी जगहों पर
            पहुँच जाते ये फूल ।

        शुभा मेहता
     
   
 

Tuesday, 14 August 2018

स्वतंत्रता दिवस

सभी मित्रों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ..

  नमन है उन सभी वीर शहीदों को ,जिनकी
शहादत की वजह से आज हम खुली हवा में साँस ले रहे हैं ,कितने ही ऐसे अनजाने शहीद होगें जिनका नाम इतिहास में दर्ज नहीं है ...धन्य है उनके माता -पिता ।
   मित्रों ,आज मैं बात करना चाहूँगी इस माँ के बारे में जिसे हम भारत माता पुकारते हैं ...पर मैं आप सबसे पूछना चाहूँगी कि क्या माँ पुकारना काफी है ,?क्या हमें इसका जतन प्यार से नहीं करना चाहिए ?
पिछले एक सप्ताह से व्हाट्सएप ,फेस बुक और भी सभी सोशल मीडिया एप्लीकेशन में जैसे बाढ़ सी आई हुई है ....वंदे मातरम ,जय भारत ,मेरा भारत महान ..
  लोग तिरंगे के  साथ प्रोफाइल पिक्चर लगा रहे है ,और भी बहुत कुछ .....
   क्या यहीं तक सीमित रह गया है देश प्रेम ....?
    जातिवाद ,धर्मवाद ,आरक्षण के नाम पर बंद का आयोजन ,आपसी मतभेद ,दंगे -फसाद ....क्या यही है
देश प्रेम ?
  मेरे देश की धरती सोना उगले .....और इसी धरती को हम कूडा करकट डालकर कितना गंदा कर रहे हैं ....
अभी हमारी सोसायटी नेंं एक वाचमैन रखा है ,कि बाहर कोई कचरा ना डाले ,बेचारा दिन भर खडा रहकर ध्यान रखता ,पर ये तथाकथित पढे-लिखे लोगों ने रात में कचरा बाहर डालना शुरु किया ।
   हमारी पवित्र नदियां जिन्हें भी हम माँ कहते है ,कचरों से भरी पडी है ..

  यहाँ मैं यही कहना चाहूँगी कि हमें स्वयं जागरूक होना पडेगा , हमारी आने वाली पीढी के आगे आर्दश उपस्थित करना होगा ,जागरूक नागरिक बनना होगा ..सभी भारतीय एक माँ भारती की संतान है ,यह भावना लानी होगी ....
चंद पंक्तियाँ माँ भारती को सर्मपित ...ये पंक्तियाँ  मुझे बहुत पसंद है ...

माँ भारती ,माँ भारती ,माँ भारती ।
  स्वर्ग भी करता तुम्हारी आरती ।।
शुभ्र ज्योत्सना सृदश अंचल है तुम्हारा
   बह रही जिसमें युगों से पुण्य धारा
जोड़ कर रवि शशी प्रगति के अश्व को
चल रहे अस्तित्व के बन सारथी ।
  माँ भारती ,माँ भारती ,माँ भारती
स्वर्ग भी करता तुम्हारी आरती।

शुभा मेहता

15th Aug 2018
 
 

 

Wednesday, 25 July 2018

किस्मत

तू चलता चला चल
  तू चलता चला चल
   अपनी लगन में
    न देख इधर
  न देख उधर
   रख आँख तेरी लक्ष्य की ओर ।
    कोई कहे अच्छी है किस्मत
    कोई कहे बुरी है किस्मत
    बात-बात पर कोसें किस्मत
     पाना चाहे इसी के सहारे सब कुछ
     पर तू चलता चला चल ...
     और तू भी चला ,खूब चला ...
    पाने को मंजिल
     हौसले बुलंद ..।
    फिर इक दिन देखा
     सामने थी मंजिल
      पा ही लिया उसे
      और साथ ही
      मुस्कुराती किस्मत खडी थी ।

   शुभा मेहता
   26th July ,2018
     
     
 

Sunday, 8 July 2018

मेरे अनुभव ..

  आज जब शाम को वॉक के लिए गई तो देखा मंजू कुछ उदास सी दिखाई दी , मैं और मंजू रोज साथ ही वॉक पर जाते हैं ,अब दोस्ती इतनी गहरी हो गई है कि बस चेहरा देख कर ही एक -दूसरे के मनोभाव पढ़ लेते हैं । मैंने पूछा.. क्या बात है आज तुम्हारा मूड कुछ उखड़ा सा लग रहा है ,कल तो बड़ी खुश थी ,बेटे ने नई गाड़ी जो ली है ..।बस मेरा इतना कहना था कि उसकी आँखों में आँसू छलछला उठे ...।
    बोली ..हाँ ...मैं तो बहुत खुश थी ..आज सुबह बेटे नें
   कहा माँ चलो मंदिर जाना है नई कार की पूजा करनें  । मैंने खुशी खुशी पूजा की थाली तैयार की ,तभी बेटा बोला माँ जल्दी करो हमें आफिस के लिए देर हो रही है ,मैं बोली बेटा तैयार तो हो जाऊँ ,तो बेटा बोला अरे माँ  ऐसे ही बैठ जाओ ,कार में ही तो जाना है ..और मैं भी खुशी के मारे बस ऐसे ही चल दी न तैयार हुई ,न पर्स लिया । मंदिर पहुँच कर पूजा की ..भगवान की भी और कार की भी ,मन ही मन बहुत प्रसन्न थी ..बेटा ;बहू कितना ध्यान रखते है ,अपनी किस्मत पर आह्लादित हो रही  थी ।
   तभी बहू के फिस से किसी का फोन आया ,और लगभग आधे घंटे वार्तालाप चला ,और मैं स्लीपर पहने ,हाथ में थाली लिए खडी रही ,फिर अचानक बेटे नें कहा माँ हमें जल्दी फिस पहुँचना है ,आप घर चले जाओ , और वो दोनो गाडी स्टार्ट करके चले गए ..मैं आवाक् सी खडी देखती रह गई ..हाथ पैर जैसे सुन्न हो गए । पास में पैसे भी नहीं लिए थे ,हाथ में थाली पकडे धीरे धीरे घर की ओर कदम बढाने लगी .....।
       सोच रही थी क्या मेरे बेटे के पास पाँच मिनिट भी नहीं थे मेरे लिए ,घर तो छोड़ ही सकता था ..और आँसू ढुलक पडे उसके गालों पर ...

    अब सवाल ये उठता है कि क्या मंजू के बेटे ने जो किया वो सही था ...नहीं न..। पर मैं जहाँ तक जानती हूँ मंजू के बेटा बहू बहुत ही सुशील और सयाने हैं ,उनका इरादा अपनी माँ को दुखी करने का कभी हो ही नहीं सकता , असल बात तो ये है कि मंजू ने अपने बेटे को कभी कोई जिम्मेदारी सौंपी ही नही , वो सभी काम स्वयं ही कर लेना चाहती है ,और उसका बेटा अपनी माँ को सुपर वुमन समझता है ,और शायद यही वजह थी ,कि वो समझ ही नहीं पाया कि उसकी माँ घर कैसे पहुँचेगी ..क्यों दोस्तों आप क्या कहते है?

  शुभा मेहता
  
 
 
    
 
 
   

Saturday, 7 July 2018

मेघ मल्हार

  गरज आए बदरा कारे
  चहुँ ओर पावस भर लाए
    मोर -पपीहा झूमे -नाचे
      कोयल छेड़े राग मल्हार
       धरती भी तो झूम रही है
        पहन चुनरिया धानी
          पत्ती -पत्ती सजी हुई है
           बूँद मोतियों से जैसे
             बच्चे उछल -उछल कर   
              करते छप्पक-छैया
               कोई नाव बना तैराता
                कोई खुद से फिसल गिर जाता
                कहीं पकौड़ो की खुशबू .....
                 वाह.......!!
                  वर्षा के आगमन से
                   त्यौहार समाँ हो जाता ।
                
              शुभा मेहता 

         7thJuly ,2018

 
            
              
            

Wednesday, 20 June 2018

अंकुर

इक बीज के हृदयतल में
   बसता है इक छोटा अंकुर
    अलसाया सा....
    सोता हुआ.....
     उठो ,उठो ..
     रवि नें आकर चुपके से कहा
      उठो ,उठो ....
     वर्षा की बूँदों नें
      आवाज़ लगाई ....
       सुना उसने ..
       सोचने लगा ..
      इस बीज के बाहर
     कितना सुंदर जग होगा !!
     वर्षा की बूँदों से
      सूरज की किरनों से
       इक बीज अंकुरित हुआ
     जग को जिलाने ..
      छाँव दिलाने.।

   शुभा मेहता