Friday, 10 February 2023

पैसा

पैसा हाथ का मैल है ,
ऐसा कहते हैं लोग ,
 अरे जनाब.....
   किस दुनियाँ  में
    जी रहे हैं आप
      यहाँ  तो हाथ में ,
        पैसा न हो अगर 
           लोग हाथ मिलाना ही 
              देते हैं छोड़.....

     शुभा मेहता 
     11th ,Feb, 2023

Thursday, 12 January 2023

पतंग

मेरे सभी ब्लॉगर मित्रों को मकर संक्रांति पर्व  की हार्दिक  शुभकामनाएँ  🌷🌷🌷🌷🌷
  यहाँ  तो यह पर्व  पतंग  पर्व  ही है ,सारा आसमान  रंग -बिरंगी पतंगों से सजा हुआ  दिखाई  देता है । ये कागज की पतंग  हमें बहुत कुछ सिखा देती है ......

  पतंग  सिखाती है ........
    जितने हल्के रहोगे 
    उड़ान  उतनी ही ऊंची होगी 
     जिंदगी में हमेशा 
       जमीन से जुड़े  रहो 
        चाहे जितना ऊपर जाओ 
          पैर जमीन  पर ही रखो 
             हवा का रुख पहचानों 
              डोर अपनी मजबूत रखो 
                सबको लेकर साथ चलो ।


शुभा मेहता 
 13th January, 2023

  

Saturday, 7 January 2023

दिल का दर्द

कल एक वृद्धाश्रम में अपनी सखी के साथ  जानें का अवसर मिला । वहाँ  जाकर मन बहुत  दुखी -सा हो गया ।
कुछ बगीचे में धूप सेक रही थी ,कुछ सीढियों पर बैठी थी ।
 सभी की आंखें रीती -सी थी । कुछ के हाथ में फोन था , किसी का भी फोन बजता तो वे झट अपनें फोन की ओर आशा भरी नजरों से देखने लगती ...इंतजार करती हुई  किसी अपने के फोन का .....।
उनकी आंखों में जो मैंने पढ़ा अभिव्यक्त  करनें की कोशिश  की है .........
  अचानक  फोन बजा 
    उनकी नजर झट 
      उधर दौडी ..
       कहाँ  बजा ....
        धीरे -से फुसफुसाई.....
          मेरा तो फोन कोमा में है 
           नहीं बजता ..
            न किसी का आता है 
              अब तो मुझे भी डर लगता है 
                अगर फोन कोमा से बाहर  भी निकला 
            और बजा ....उठाऊंगी नही 
            अब और काम भी क्या होगा 
           मेरा सब कुछ छीन कर .
           यहां पहुँचा दिया 
             अब कुछ बचा ही नही है ।

     शुभा मेहता 
   7th January  ,2023

              

           

Friday, 30 December 2022

कैसे हो ...

कैसे हो .....

मेरे ब्लॉगर परिवार  को नववर्ष की हार्दिक बधाई...🌷🌷🌷🌷
  आज  वर्ष  का अंतिम  दिन आ गया है ,सोचा अपने मित्रों के साथ एक सुंदर रचना सांझा करूं जो मुझे बहुत  पसंद आई, आशा है आप सभी को पसंद  आएगी ...सकारात्मक  जीवन जीने की प्रेरणा देती हुई  ये गुजराती कविता ,जिसका हिंदी अनुवाद  ,या फिर यूं कह सकते हैं कि मेरे शब्दों में प्रस्तुत  कर रही हूं ............कवि हैं श्री ध्रुव  भट्ट  जी ।


अचानक  जब कोई  
रास्ते में मिल जाता है 
 और पूछता है ..
  कैसे हो .....?
  तो मैं कहती हूं
   कि जैसे समुद्र की मौजें  
     हमेशा मौज -मस्ती में रहती हैं 
       मैं भी वैसी ही हूँ  ..मस्त ..
         और ऊपर  से कुदरत की दया है । 
         मेरी जेब भले ही फटी हुई  है 
          पर उस जेब के कौने में 
           छलकती -महकती खुशी को रखा है 
            अकेली भी खडी होती हूँ  
              तो भी लगता है जैसे मेले में खडी हूँ 
               मेरे दिल की जो छोटी सी पिटारी है 
                जिसमें ताला नहीं लगा सकते 
                 फिर भी खुशी का खजाना 
                   सुरक्षित  है ..।
                   जीवन में खुशी और दुख तो 
                   आते -जाते रहते हैं 
                    पर समुद्र  कहाँ  परवाह  करता है 
                      आती -जाती मौजों का 
                       सूरज रोज उगता है ,अस्त होता है 
                        पर मेरे सिर  पर आकाश  
                          हमेशा ही रहता है ..।
                    



Friday, 16 December 2022

कैसी कट रही है जिंदगी ?

कैसी कट रही है जिंदगी ?
हां ,कट ही रही है 
  ककडी, गाजर ,प्याज ,मूली के सलाद सी 
   कभी ककडी कडवी सी निकल जाती है 
    कभी जिंदगी मूली -सी चरपरी  हो जाती है 
       कभी गाजर -सी मीठी 
         कभी-कभी प्याज के आँसू दे जाती 
          यही तो है जिंदगी ...।
     शुभा मेहता 

  23April,2023
  
 
 

Thursday, 17 November 2022

सुर

सु.......सुर से जीवन 
जीवन से सुर 
नाद ब्रम्ह ओंकार सुर 
  सुर की महिमा 
   क्या गाऊं मैं..
     नदियों की कलकल में सुर 
       पंछी की चहक में सुर  
 भौंरे की गुंजन में सुर  
  वर्षा की बूंदों में सुर 
  जब लगता है 'गीत 'शब्द  में 
   सम उपसर्ग  .....
     तब बनता है संगीत  
      सात सुरों का संगम 
       शुद्ध-विकृत मिल होते बारह 
     श्रुतियां होती हैं बाईस  
      स्वर और  श्रुति में भेद है इतना 
        जितना कुण्डली और सर्प में 
      स्वर बनते नियमित  आंदोलन  से 
       होते मधुर  ,करते प्रसन्नचित 
        सुर से जीवन, जीवन  से सुर  ।

    शुभा मेहता
    17th,November 2022

Tuesday, 15 November 2022

किताब

किताबें ,सबसे अच्छी दोस्त  हमारी ...  
 मैंने जैसे ही इक सुन्दर से कवरवाली  किताब खोली 
  तो ..जैसे मैं तो उसमें खो ही गई  
    शायद ही कोई  ढूँढ  पाएगा मुझे 
      मेरी कुर्सी ,मेरा घर, 
       मेरा गद्दा ,मेरी चादर, 
मेरा गाँव.....सब पीछे छूट गया 
  रानी के साथ  घूमी ,
    राजकुमारी के साथ खेली 
      मछलियों के साथ  समुद्र की यात्रा की 
       कुछ दोस्त  भी बने 
         जिनका दुख -सुख मैंने बांटा 
          जैसे ही किताब  खत्म करके बाहर  आई 
            वो ही कुर्सी ,वो ही घर ...
             पर मन के अंदर रह गई  
            सुनहरी यादें......

शुभा मेहता 
  15th November  ,2022